मुंबई:बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को महाराष्ट्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से पूछा कि मुंबई-गोवा राष्ट्रीय राजमार्ग की मरम्मत और चौड़ीकरण का काम धीमी गति से क्यों हो रहा है? कार्यवाहक न्यायाधीश नरेश पाटील और न्यायाधीश जी.एस कुलकर्णी ने यह भी पूछा कि इस काम की गुणवत्ता की निगरानी करने और सत्यापन के लिए किसी विशेषज्ञ की नियुक्ति हुई है या नहीं?
अदालत ने निविदा की मूल प्रति की मांग की है। इसके अलावा अदालत ने इस परियोजना की लागत और सुरक्षा कदमों से संबंधित दस्तावेज की भी मांग की है। इस राजमार्ग को मौजूदा दो लाइन से बदलकर चार लाइन का बनाया जा रहा है। राजमार्ग पर वाहनों पर चलने वाले नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के उपाय उठाने पर कोर्ट ने सरकार से अनेक चीजें पूछी हैं। पीठ शहर के एक वकील ओवैस पेचकर की ओर से दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में राजमार्ग की खराब स्थिति बयां की गई है।
गड्ढों के कारण कई मौतें
इस राजमार्ग पर मॉनसून के समय बहुत ज्यादा गड्ढे होने से यातायात जाम रहने की शिकायतें थीं और इन गड्ढों में अनेक नागरिकों की मौत हो गई थी। याचिका में बताया गया कि हालांकि राजमार्ग की मरम्मत का काम 2011 में शुरू हुआ था लेकिन नियुक्त ठेकेदारों ने केवल थोड़ा सा हिस्सा ही ठीक किया है। यह राजमार्ग 555 किलोमीटर का है, लेकिन इसमें से एनएचएआई केवल 84 किलोमीटर के हिस्से का रखरखाव करता है। इस 84 किलोमीटर हिस्से में से 70 प्रतिशत राजमार्ग की मरम्मत हुई है। अपने हिस्से का काम राज्य सरकार ने पिछले साल शुरू किया था। सरकारी वकील निशा मेहरा ने कोर्ट को बताया कि मरम्मत का काम 2020 तक ही पूरा होगा, लेकिन सरकार के इस दावे से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ।
कोर्ट ने फटकारा
‘एनएचएआई ने 84 किलोमीटर हिस्से की मरम्मत का काम हाथ में लिया है, वह भी 8 साल पहले। वह अभी तक काम पूरा नहीं कर सका है। आप अगले दो साल में 470 किलोमीटर की मरम्मत कैसे कर सकेंगे। क्या राज्य सरकार ज्यादा होशियार है या एनएचएआई ठीक ठेकेदार नहीं है।’ कोर्ट ने पूछा की इस कछुआ चाल का क्या कारण है? गौरतलब है कि पिछले महीने ही राज्य सरकार और एनएचएआई ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वे मुंबई-गोआ राष्ट्रीय राजमार्ग में मौजूद गड्डों को 5 सितंबर तक भर देंगे।
राजमार्ग मरम्मत की धीमी गति पर कोर्ट नाराज

