नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी अर्थशास्त्र के नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी से बातचीत कर रहे हैं। कोरोना महामारी के इकोनॉमी पर असर और उससे निपटने के उपायों पर यह चर्चा हो रही है। बनर्जी का कहना है कि कोरोना के आर्थिक असर को देखते हुए हमने अभी तक बड़ा आर्थिक पैकेज घोषित नहीं किया है। हमने जो पैकेज दिया है वह जीडीपी के 1% के बराबर है जबकि, अमेरिका 10% तक पहुंच गया। एमएसएमई सेक्टर के लिए ज्यादा राहत देने की जरूरत है।
अभिजीत का कहना है-
- बाजार में मांग बढ़ाना अहम है। अगर हम निचले तबके के 60% लोगों को थोड़ा ज्यादा पैसा देंगे तो कोई नुकसान नहीं होगा
- अस्थाई राशन कार्ड की व्यवस्था शुरू होनी चाहिए। मुझे लगता है कि गरीबों को देने के लिए हमारे पास पर्याप्त दाल और तेल है।
- एनजीओ के जरिए लोगों को मदद पहुंचाने के लिए राज्य सरकारों को पैसा देना चाहिए। कुछ गलतियों के लिए भी तैयार रहना चाहिए। हो सकता है कुछ पैसा जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाए।
- जिन लोगों को सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं मिल रहा, उन्हें शामिल करने की कोशिश करनी चाहिए।
सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च के फेलो भी रह चुके बनर्जी
भारत में जन्मे और अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) में प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी को पिछले साल अर्थशास्त्र का नोबेल मिला था। 21 साल बाद किसी भारतवंशी को अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए चुना गया। अभिजीत, उनकी पत्नी एस्थर डुफ्लो और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर माइकल क्रेमर को वैश्विक गरीबी कम करने के प्रयासों के लिए अर्थशास्त्र का नोबेल दिया गया। अभिजीत ब्यूरो ऑफ द रिसर्च इन इकोनॉमिक एनालिसिस ऑफ डेवलपमेंट के पूर्व प्रेसिडेंट हैं। वे सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च के फेलो और अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स-साइंसेज एंड द इकोनॉमिक्स सोसाइटी के फेलो भी रह चुके हैं।

