सुखी बनने का राज छिपा है सद्गुणों के विकास में- मुनिश्री जिनेश कुमार जी
पालघर। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री जिनेश कुमार जी ठाणा 2 के सान्निध्य में व्यक्तित्व विकास कार्यशाला “सुखी बनो” का आयोजन तेरापंथ युवक परिषद द्वारा रविवार 10 नवंबर को सुबह 9 बजे तेरापंथ भवन पालघर में किया गया। इस अवसर पर पालघर जिले से अच्छी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
इस अवसर पर सुखी बनो विषय पर उद्बोधन देते हुए मुनिश्री जिनेश कुमार जी ने कहा हमारे भीतर दो धाराएं प्रवाहित होती है। एक असत कि व दूसरी सत कि। जब असत धारा प्रवाहित होती है तब विषमता, अनैतिकता, क्रोध, घृणा का भाव पैदा होता है और जब सत कि धारा प्रवाहित होती है तब नैतिकता, समता, विनम्रता आदि गुणों का विकास होता है। सत धारा के प्रवाह का नाम है व्यक्तित्व विकास। व्यक्तित्व शब्द व्यक्ति से बना है। जो व्यक्त करता है और जो व्यक्त करने का ढंग है उसे व्यक्तित्व कहते हैं। व्यक्तित्व का निर्माण तभी होता है जब व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक व भावनात्मक संपदा से सम्पन्न होता है। मुनिश्री जी ने आगे कहा जब व्यक्ति के जीवन में सत की धारा प्रवाहित होती है तो वह सुखी होता है। सुखी बनने के लिए पाप का मूल लोभ, व्याधि का मूल रस, शोक का मूल स्नेह को त्यागना चाहिए। सुखी जीवन की चाबी है संतोष, संयम और अहिंसा। आकांक्षा के आकाश में उड़ने से सुख नहीं मिलता। समता के सागर में गोते लगाने वाला सुखी हो सकता है। लोग सुख को पदार्थ वस्तु में खोजते हैं पर वहां वह नहीं मिलता है। पदार्थ सुविधा दे सकता है शांति नहीं, शांति और सुख सद्गुणों के विकास से ही संभव है।
इस अवसर पर मुनि श्री परमानंद जी ने कहा सुख और दुख मन से उत्पन्न हुई स्थितियां है। आपके हाथ में है सुखी बनाना। परिस्थितियां नहीं बदलेगी अपनी मन स्थितिया बदलो तभी आप सुखी रामबन सकोगे। कार्यक्रम का शुभारंभ विरार तेरापंथी सभा के अध्यक्ष तेजराज जी हिरण के मंगलाचरण से हुआ आभार ज्ञापन तेयुप अध्यक्ष हितेश सिंघवी ने किया। इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण जी की मार्ग सेवा के संदर्भ में बोईसर तेरापंथ सभा के अध्यक्ष दिलीप राठौड़, विरार सभा मंत्री अजयराज फुलफगर, पालघर सभा उपाध्यक्ष चतुर तलेसरा ने अपने विचार व्यक्त किये। यह जानकारी दिनेश राठौड़ ने दी।
पालघर में व्यक्तित्व विकास कार्यशाला सुखी बनो का आयोजन

