अहिंसा के पुजारी थे महात्मा गांधी- मुनिश्री जिनेश कुमारजी
पालघर। महातपस्वी अचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री जिनेश कुमार जी के ठाणा 2 के सान्निध्य में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत अहिंसा दिवस पर अणुव्रत समिति द्वारा अहिंसा रैली एवं कार्यक्रम 2 अक्टूबर को सुबह 8:00 बजे तेरापंथ भवन में आयोजित किया गया। मुनिश्री जिनेशकुमार जी से मंगल पाठ श्रवण कर अहिंसा रैली तेरापंथ भवन से प्रारंभ हुई जो नगर के मुख्य मार्गों पर अहिंसा के घोष को बुलंद करती हुई जन जन के आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। रैली में सभी संस्थाओं के सदस्य अपने-अपने गणवेश में सुवाक्य युक्त तख्तियां लेकर चल रहे थे। जो अहिंसा का पावन संदेश दे रही थी। छोटे-छोटे बच्चों ने गांधी जयंती पर महात्मा गांधी का वेष धारण कर सबको बापू की याद दिलाई।
रैली पुनः सभा भवन पहुचकर धर्म सभा में परिणत हो गई। इस अवसर पर उपस्थित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री जिनेश कुमार जी ने कहा अहिंसा शाश्वत धर्म है। अहिंसा जीवन का दर्शन है। अहिंसा सार्वभौम तत्व है। अहिंसा भारत की आत्मा है।
अहिंसा का अर्थ है प्राणी मात्र के प्रति संयम रखना। मन, वचन, काया से हिंसा नहीं करना ही अहिंसा है। जहां अहिंसा है वहाँ समाधान, शांति और समाधि है।
इस अवसर पर गांधी व शास्त्री जयंती पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा महात्मा गांधी अहिंसा के पुजारी सत्य के साधक, ज्ञान के धनी, निष्काम भक्ति व संयम से ओतप्रोत थे। उनका रहन सहन खान-पान सादा था। उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, उन्होंने अस्पृश्यता निवारण, सत्याग्रह, विधवा विवाह, दास प्रथा आदि कुरीतियों पर प्रहार किये। लाल बहादुर शास्त्री सादगी पसंद व्यक्ति थे। मुनिश्री जी ने आगे कहा आज के विषाक्त वातावरण में अणुव्रत की बहुत आवश्यकता है। घरेलू हिंसा को रोकना बहुत जरूरी है।
इस अवसर पर मुनिश्री परमानंद जी ने कहा अहिंसा सभी जीवो का कल्याण करने वाली है। महात्मा गांधी अहिंसा के प्रयोक्ता थे। यह जानकारी दिनेश राठौड़ दी।
पालघर में अहिंसा दिवस मनाया गया

