कांदिवली (मुंबई)। आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य मुनि श्री कुलदीप कुमार जी स्वामी एवं मुनि श्री मुकुल कुमार जी का दिनांक 30 जून 2025, सोमवार को कांदिवली में पारसजी दुगड और विमलादेवी दुगड़ द्वारा संचालित प्रेक्षाध्यान योग साधना केंद्र में पधारना हुआ एवं सेंटर का अवलोकन किया।
मुनिश्री कुलदीप कुमार जी स्वामी ने सभी साधक साधिकाओं मंगल पाठ सुनाया । मुनिश्री मुकुल कुमार जी स्वामी ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा जीवन में कैसी भी परिस्थितियां हो चाहे अनुकूल परिस्थिति है चाहे प्रतिकुल परिस्थिति है अगर हम देखना सीख जाए केवल सात्विक भाव से देखने का प्रयास करें तो वह किसी भी रूप में हमें प्रभावित नहीं करती। हृदय परिवर्तन द्वारा अंत स्पर्श को जो स्पर्श कर लेता है वो ध्यान की विलक्षणताओं को उपलब्ध कर लेता है। बहुत लंबे समय से यह कार्य चल रहा है प्रश्न होता है कि मकान की अपेक्षा क्यों? समाधान मिला अगर बरसात नहीं होती और आंधी तूफान ना होते तो मकान की अपेक्षा नहीं होती । उसी तरह शारीरिक, मानसिक और भावात्मक बीमारी के लिए तनाव के लिए अपेक्षा है और वह है प्रेक्षाध्यान की। उन्होंने अपना उद्बोधन देते हुए फरमाया पारसजी दुगड हमारे धर्मसंघ के एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अनेक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उपयोग किया है। रंग चिकित्सा मुद्रा विज्ञान इनके प्रिय विषय है । प्रेक्षाध्यान के क्षेत्र में भी 700 कार्यशाला का आयोजन किया है। प्रसन्नता की बात है कि फूलों का काम सुगंध देना होता है उसकी सुगंध को जन-जन तक पवन पहुंचाता है। उसी तरह पारसजी पवन बनकर प्रेक्षाध्यान को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। इसी तरह धर्म संघ की खूब-खूब सेवा करते रहे।
विहार करते समय मुनिवृन्द प्रेक्षा ध्यान केंद्र में पधारे । मुनिश्री के प्रति वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक पारसमल दुगड ने कृतज्ञता व आभार व्यक्त किया। जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष ज्ञानजी भंडारी ते.यु.प के अध्यक्ष राजेंद्र कुमारजी दुगड अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे।
मुनिश्री कुलदीप कुमार जी स्वामी ठाणा -2 ने किया प्रेक्षाध्यान योग साधना केंद्र का अवलोकन

