विकास धाकड़/ मुंबई। आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री मुकुल कुमार जी का भुवनभानु सूरी संप्रदाय के गच्छाधिपति श्री राजेंद्र सुरीश्वर जी, आचार्य मुक्तिवल्लभ सुरीश्वर जी एवं अन्य संतो के साथ आध्यात्मिक मिलन हुआ। इसी अवसर पर 400 से अधिक पुस्तक के रचयिता आचार्य विजय रत्न सुंदर सुरीश्वर से भी अत्यंत स्नेह सौहार्द एवं आत्मीय भाव से मंगल मिलन हुआ।
इस अवसर पर आचार्य विजय रत्न सुंदर सुरीश्वर जी ने कहा-रिश्तों को रिपेयर करना है। किन्तु आज रिश्तों का रिप्लेसमेंट हो रहा है। जिनशासन की प्रभावना के लिए हमें सघन ही नहीं सामूहिक प्रयास करना होगा।
मुनि मुकुल कुमार जी ने जैन आगमो में छिपे रहस्यों की जानकारी कैसे जन – जन तक पहुंचे। युवपीढ़ी अपनी प्रकृति और संस्कृति को कैसे सुरक्षित रखें इसकी विशद विवेचना की। दो धराओं का मिलन सबको भावविभोर कर रहा था। सुरेश धोका, हस्तीमल भंडारी, मुकेश कोठारी, रमेश सोलंकी व मूर्तिपूजक संघ के स्मित कोठारी, अशोक कोठारी, प्रमोद सूर्या, धर्मेंद्र बोथरा आदि श्रावकों ने सेवा का लाभ लिया।


