तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम, बेंगलुरु सेंट्रल द्वारा “कौटिल्य 3.0 -ह्यूमन इंटेलिजेंस इन द एरा ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर एक विशेष एआई कॉन्क्लेव का सफल आयोजन रविवार, 3 मई 2026 को बीएमएस सभागार में किया गया। यह एक पूर्ण-दिवसीय एआई समिट था, जिसमें 250 से अधिक प्रोफेशनल्स, स्टूडेंट्स और एंटरप्रेन्योर्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत श्री अशोक जी सुराणा एवं टीम द्वारा मंगलाचरण से हुई, स्वागत भाषण श्रीमती वर्षा जैन, मंत्री टीपीएफ बेंगलुरु सेंट्रल द्वारा दिया गया, इसके पश्चात अध्यक्ष श्री पुष्पराज चोपड़ा ने सभी उपस्थितजनों का स्वागत किया, माननीय वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया तथा इस सत्र की महत्ता पर प्रकाश डाला कि यह कार्यक्रम किस प्रकार “ह्यूमन इंटेलिजेंस इन द एरा ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” को समझने में सहायक होगा।
इसके बाद टीपीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हिम्मत मांडोत ने संगठन की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी, जिसके पश्चात राष्ट्रीय महामंत्री श्री मनीष कोठारी एवं साउथ ज़ोन अध्यक्ष श्री विक्रम कोठारी ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत नेटवर्किंग सेशन से हुई, जिसके बाद प्रथम सत्र आचार्य श्री महाश्रमणजी के सुशिष्य साध्वीश्री पवनप्रभा जी (ठाना-4) की पावन उपस्थिति में आयोजित हुआ, जिसमें उन्होंने “अध्यात्मिक इंटेलिजेंस वर्सेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” के संदर्भ में आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता के महत्व पर प्रकाश डाला। दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता श्री राहुल बोथरा, सीएफओ – स्विगी ने “व्हाट यू नो दैट एआई डज़ नॉट” विषय पर अपने विचार साझा किए, जिसमें उन्होंने आत्मविश्वास और मानव बुद्धिमत्ता की प्रासंगिकता पर जोर दिया। तीसरे सत्र में श्री सौरभ बोथरा, को-फाउंडर – हाबिल्ड ने “हैबिट बिल्डिंग” के महत्व पर प्रकाश डाला। यह सत्र अत्यंत रोचक और इंटरैक्टिव रहा, जिसमें प्रतिभागियों ने योगाभ्यास भी किया और अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए। चौथा सत्र श्री चेतन बरलोटा द्वारा एक प्रैक्टिकल वर्कशॉप के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने विभिन्न उपयोगों के लिए अपना एआई असिस्टेंट बनाने का लाइव डेमो प्रस्तुत किया। पांचवां सत्र श्री आनंद लुनिया, फाउंडर पार्टनर – इंडिया कोटिएंट द्वारा “एआई – डिनायल मोड” विषय पर आधारित था, जिसमें उन्होंने नई तकनीकों के प्रति मानव की प्रारंभिक अस्वीकृति और भविष्य में एआई की भूमिका पर चर्चा की।
अंतिम सत्र एक पैनल डिस्कशन के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें पैनलिस्ट के रूप में श्री निलेश डुंगरवाल (को-फाउंडर – वर्कइंडिया), श्री अजय अग्रवाल (को-फाउंडर – राम्प.एआई) एवं श्री विकास जैन (को-फाउंडर – मल्टिप्ल) उपस्थित थे। इस सत्र का संचालन श्री राहुल डागा, वीपी टीपीएफ बेंगलुरु सेंट्रल द्वारा किया गया। चर्चा के दौरान “ह्यूमन इंटेलिजेंस इन द एरा ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” की प्रासंगिकता पर गहन विचार-विमर्श हुआ और श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए। कार्यक्रम का समापन एक हल्के-फुल्के अंदाज़ में कॉमेडियन श्री दीपक शर्मा के स्टैंडअप कॉमेडी सेशन के साथ हुआ, जिसके पश्चात लकी ड्रॉ आयोजित किया गया। राष्ट्रीय टीम द्वारा नए टीपीएफ फेलो सदस्य श्री राहुल डागा, श्री पियूष डागा एवं श्रीमती स्वर्णमाला पोखरणा का सम्मान किया गया।
इस आयोजन के प्रायोजक थे – ईआईएमआर बिजनेस स्कूल, अटिका गोल्ड, बीओ एंड कंपनी एलएलपी एवं परिमल अगरबत्ती। साथ ही अटिका गोल्ड के मालिक डॉ. बाबू का भी सम्मान किया गया।
कार्यक्रम की शोभा टीपीएफ राष्ट्रीय टीम के अध्यक्ष श्री हिम्मत मांडोत, महामंत्री श्री मनीष कोठारी, कोषाध्यक्ष श्री नरेश कठोतिया, चीफ एक्स-ट्रस्टी श्री एम. सी. बलदोटा, बेंगलुरु सेंट्रल के पास्ट प्रेसिडेंट्स श्री अशोक सुराणा, श्री लक्ष्मीपत मालू, श्री हितेश गिरिया, बेंगलुरु वेस्ट के वीपी श्री संजय मालू, टीपीएफ एनईसी मेंबर्स एवं टीपीएफ ब्रांच प्रेसिडेंट्स (दिल्ली, नोएडा, कोलकाता, मुंबई, सूरत, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, मैसूर, चिकमंगलूर, उत्तर कर्नाटक) की गरिमामयी उपस्थिति से बढ़ी। साथ ही अभातेयुप के अध्यक्ष श्री पवन मांडोत, संगठन मंत्री श्री रोहित कोठारी, गांधीनगर तेमम. अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मीजी बोहरा, मंत्री श्रीमती विजेता रायसोनी, गांधीनगर तेयुप अध्यक्ष श्री प्रसन धोका, महासभा उपाध्यक्ष श्री प्रकाश लोढ़ा, हनुमंतनगर महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती संगीता तातेड़ तथा अन्य अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गौरवशाली बना श्री गौरव कोठारी और श्री आदर्श सुराणा ने इस कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम के संयोजक श्री आशीष नाबेरा (सहमंत्री) एवं श्री श्रेयांश नाहर (सहमंत्री) तथा श्री आदर्श सुराणा (सदस्य, टीपीएफ बैंगलोर सेंट्रल) थे। श्री आशीष कुमार नाबेडा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया| समग्र रूप से यह कार्यक्रम अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा, जिसे इसकी प्रासंगिकता, गहराई और व्यावहारिक उपयोगिता के लिए सराहा गया। इसने प्रतिभागियों को “ह्यूमन इंटेलिजेंस इन द एरा ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” के महत्व को समझने में स्पष्टता और आत्मविश्वास प्रदान किया।
कौटिल्य 3.0 – “ह्यूमन इंटेलिजेंस इन द एरा ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस”

