कांतारा: चैप्टर 1 का बहुप्रतीक्षित ट्रेलर आ चुका है और इसकी सबसे बड़ी झलक में चमक रही हैं राजकुमारी कनकवती यानी रुक्मिणी वसंत। फ़िरोज़ी रंग की सुनहरी बॉर्डर वाली ओढ़नी, गहनों से लदा-फदा शाही शृंगार भारी हार, चूड़ियों की कतार, झुमके, बाजूबंद, कमरपट्टा, नथनी और मांगटीका इन सबमें रुक्मिणी का अंदाज़ बिल्कुल अमर शान का एहसास कराता है। हल्का-सा चमकीला श्रृंगार और नन्हीं बिंदी उनकी गरिमा और दमख़म का परफ़ेक्ट संतुलन दिखाते हैं। परदे पर उनकी मौजूदगी ऐसी लगती है जैसे धरती की खुशबू और राजसी ठाठ-बाट मिलकर एक ही रूप में ढल गए हों देखने वाला बस वाह! कह उठे।
कांतारा: चैप्टर 1 लोककथा, आस्था और अग्नि का ऐसा महागाथा वादा करता है, जो हमारी मिट्टी की जड़ों से फूटा है। और ट्रेलर ने साफ़ कर दिया है कि रुक्मिणी की राजकुमारी कनकवती इस तूफ़ानी दास्तान का असली केंद्र होंगी। कुछ ही झलकियों में उन्होंने एक ऐसी राजकुमारी की तस्वीर खींच दी है शालीन, सशक्त और देवत्व की झंकार वाली। रुक्मिणी कहती हैं, “मेरे लिए राजकुमारी कनकवती की यात्रा ज़िंदगी की सबसे ख़ास राह रही।
सिर्फ़ शाही दिखना मक़सद नहीं था बल्कि हर हाव-भाव में अपनी मिट्टी, अपनी लोककथा और अपनी आस्था को जीना था। शायद इसी वजह से ट्रेलर इतना असरदार बन पड़ा, क्योंकि इसमें पूरी संस्कृति की रूह चमक रही है। कनकवती शाही हैं, हाँ, लेकिन साथ ही इंसानी और संवेदनशील भी। मुझे उनकी गरिमा के साथ-साथ उनका जज़्बा भी अपनाना पड़ा। अब बेसब्री से इंतज़ार है कि लोग उन्हें सिनेमा घरों में देखें।”आगे रुक्मिणी वसंत अपने हुनर को और नए रंग-रूप देने वाली हैं। तेज़-तर्रार एनटीआर–प्रशांत नील की जोड़ी के साथ फ़िल्म और साथ ही एक दिलचस्प अंतरराष्ट्रीय परियोजना टॉक्सिक: अ फेरीटेल फ़ॉर ग्रोन-अप्स भी।
कांतारा: चैप्टर 1 के ट्रेलर में लोककथा की रानी बनकर छा गईं रुक्मिणी वसंत

