सद्गुणों की सुगंध से जीवन सुभाषित बने मुनि जीनेश कुमार
बोईसर। महा तपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के शिष्य मुनि श्री जीनेश कुमार जी थाना 2 के सानिध्य में जैन उपाश्रय में समस्त प्रवासी राजस्थानी समाज के लिए जीवन जीने की कला विषय पर जाहिर प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा द्वारा किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री जीनेश कुमार जी ने कहा जन्म और मृत्यु के बीच की अवस्था का नाम है -जीवन। जीवन जीना एक बात है पर कलात्मक ढंग से जीवन जीना बिल्कुल दूसरी बात है। धुवा बनकर 100 साल भी जिए तो व्यर्थ है। और प्रकाश बनकर एक मूर्हत भी जिए तो जीना सार्थक है। कलात्मक जीवन जीने के लिए जरूरी है- सहनशीलता ,विनय, शीलता, परिश्रम शीलता ,चरित्र सिलता, और संस्कार,। सकारात्मक सोच, सेवा- सहयोग ,आहार शुद्धि, व्यसनमुक्ती ,प्रभु भक्ति, सादगी आदि गुणों से जीवन सुगंधित बन जाता है ।मुनि जीनेश कुमार ने आगे कहा राजस्थानी समाज परिश्रमी है। वह अपनी मेहनत से आगे बढ़ रहा है ।परंतु व्यापार में ईमानदारी, नीति ,प्रमाणिकता रहे। आपस में प्रेम सद्भावना रहे यह बहुत जरूरी है ।परदेस में रहते हुए भी अपनी राजस्थानी संस्कृति भाषा भूषा सात्विक भोजन को नहीं भूले ।किसी के साथ धोखाधड़ी ना करें क्योंकि दूसरों को तकलीफ देकर अनीति से कमाया धन कभी भी सुख शांति नहीं देता है। बच्चों में अच्छे संस्कार डाले परिवार में प्रेम बना रहे। जिससे आपका जीवन आनंदमय बन सके।
इस अवसर पर मुनि परमानंद ने कहा आधुनिक युग में लोगों के जीवन जीने का ढंग बदलता जा रहा है। जिससे जीवन में नित नई समस्याएं खड़ी हो रही है। सुखी जीवन जीने के लिए जीवन जीने की कला सीखे।
इस अवसर पर जैन स्वेतांबर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष दिलीप राठौड़ ने समस्त प्रवासी राजस्थानी समाज का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा ,तेरापंथ युवक परिषद ,तेरापंथ महिला मंडल, का विशेष योगदान रहा इस कार्यक्रम में सकल जैन संघ ,विश्वकर्मा मेवाड़ सुथार, राजपुरोहित ,माली समाज ,सीरवी विकास मंडल, श्री मेवाड़ मित्र मंडल, गायरी ,खत्री ,बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद ,एवं समस्त प्रवासी राजस्थानी समाज की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
जीवन जीने की कला विषय प्रवचन कार्यक्रम संपन्न

