निकिता दत्ता अब अपने करियर के एक नए अध्याय में कदम रख रही हैं — एक ऐसा अध्याय जिसे परिभाषित कर रहे हैं उनके दमदार अभिनय और समझदारी से चुने गए किरदार। हाल ही में रिलीज़ हुई तीन फ़िल्में — द वेकिंग ऑफ ए नेशन, ज्वेल थीफ और उनकी पहली मराठी फ़िल्म घरात गणपती – ये साबित करती हैं कि वे केवल एक खूबसूरत चेहरा नहीं, बल्कि एक बहुआयामी अभिनेत्री हैं।
द वेकिंग ऑफ ए नेशन में, जो एक राजनीतिक ड्रामा है, निकिता ने एक अहम किरदार निभाया है जो विचारधारा और पहचान की लड़ाई के बीच फंसी एक महिला की कहानी है। उनका अभिनय सधा हुआ लेकिन असरदार है — एक ऐसी महिला जो नाज़ुक भी है और मज़बूत भी, जो उथल-पुथल के बीच भी खुद को खोने नहीं देती। ज्वेल थीफ में उन्होंने एक रहस्यमयी और सलीकेदार किरदार निभाया है। फिल्म में भले ही कई मोड़ और सस्पेंस हों, लेकिन निकिता अपने संतुलित और आत्मविश्वास से भरे अभिनय के ज़रिए दर्शकों का ध्यान खींचती हैं – बिना ज़्यादा कोशिश के।
घरात गणपती में, जो उनकी पहली मराठी फ़िल्म है, निकिता ने अब तक का सबसे भावनात्मक अभिनय दिया है। सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पृष्ठभूमि पर बनी इस कहानी में उन्होंने भाषा और भावनाओं को सहजता से अपनाया है — जैसे वे हमेशा से ही क्षेत्रीय सिनेमा का हिस्सा रही हों। इन तीनों भूमिकाओं के साथ, निकिता के करियर में एक नया मोड़ आ गया है। अब वे ऐसे किरदार चुन रही हैं जो उन्हें एक अभिनेत्री के रूप में चुनौती देते हैं और निखारते हैं। हो सकता है वे सबसे ऊँची आवाज़ न हों, लेकिन हर सीन में उनकी मौजूदगी इतनी प्रभावशाली होती है कि नज़रें उन्हीं पर टिक जाती हैं। निकिता दत्ता अब केवल अभिनय कर नहीं रही हैं – वे अपनी जगह बना रही हैं।
हर फ्रेम में छाप छोड़ रही हैं निकिता दत्ता

