बीजिंग:खतरनाक कोरोना वयारस का कहर पूरी दुनिया में कायम है। दुनियाभर के शोधकर्ता चमगादड़ों में कई प्रकार के वायरसों की तलाश कर रहे हैं ताकि अगली महामारी के बारे में पहले ही भविष्यवाणी की जा सके। अब तक 500 खतरनाक वायरस को खोजा जा चुका है। खास बात यह है कि इन्हें ऐसी गुफाओं में खोजा गया है, जहां चमगादड़ों की बस्ती है।
चीन के यूनन प्रांत में मौजूद चूना पत्थर की गुफाओं में वैज्ञानिकों का एक दल विशेष सुरक्षा सूट पहनकर नए प्रकार के घातक वायरसों की खोज करने में जुटा है। वैज्ञानिक यहां से चमगादड़ों के जालों, थूक और खून समेत कई तरह के नमूने एकत्रित करते हैं। अमेरिकी एनजीओ इकोहेल्थ एलाइंस नए घातक वायरसों की पहचान करने और बचाव करने में मदद करता है। इसके वैज्ञानिक पीटर दासजाक एक वायरस खोजी हैं, जो 10 वर्षों में 20 से ज्यादा देशों में खतरनाक वायरस की खोज कर चुके हैं। उनके जैसे खोजकर्ता जानवरों में पाए जाने वाले हर तरह के वायरस की जानकारी वैज्ञानिकों को मुहैया कराते हैं। वैज्ञानिक इसकी जानकारी की मदद से बताते हैं कि कौन-सा वायरस इंसानों में फैल सकता है ताकि कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए दुनिया को पहले ही तैयार किया जा सके।
कई जानवर बनते हैं वायरस के वाहक
इन वायरसों को इंसानों में फैलने के लिए माध्यम की जरूरत होती है। ऐसे में बिल्ली, ऊंट,पैंगोलिन और अन्य स्तनपायी जानवार जो इंसानों के पास निवास करते हैं , इस वायरस के प्रसार का माध्यम बनते हैं। नेचर पत्रिका में कहा गया है कि चमगादड़ों में बड़ी संख्या में घातक वायरस होते हैं जो इबोला, सार्स और कोविड-19 जैसी महामारियों का कारण बनते हैं।
सार्स महामारी के बाद खोज में आई थी तेजी
2003 में सार्स महामारी से पहले कोरोना वायरस के बारे में ज्यादा अध्ययन नहीं किया गया था। उस समय तक सिर्फ दो ही प्रकार के वायरस के बारे में पता था जिसे 1960 में खोजा गया था। 2009 में यूएस एड द्वारा वित्तपोषित प्रेडिक्ट की स्थापना की गई। इस संस्थान ने इकोहेल्थ एलाइंस, द स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन, द वाइल्ड लाइफ कॉन्जर्वेशन सोसाइटी और कैलिफोर्निया की कंपनी के साथ एक महामारी ट्रैकर बनाया। इसका उद्देश्य नए बीमारियों की पहचान करना था। दासजाक ने कहा, हमने सार्स की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए खोज शुरू की। लेकिन, बाद में हमें पता चला कि हजारों प्रकार के कोरोनावायरस हैं, इसलिए हमने अपना ध्यान उन्हें खोजने में केंद्रित किया।
चीन की गुफाओं में पहले ही मिला था कोविड-19!
जब संक्रमण का फैलाव होने लगा तब वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी के विरोलॉजिस्ट शी जेंगली ने उसका मिलान पहले से मौजूद कोरोना वायरस की लाइब्रेरी से किया। पता चला कि कोरोना यूनान की गुफाओं में 2013 में मिले नमूनों से 96.2 फीसदी मेल खाता था। दासजाक ने कहा, यह जानना कि नया वायरस कहां से आया और ये इंसानों तक कैसे पहुंचा, यह महत्वपूर्ण जानकारी है। यह महामारी रोकने को समय पर कदम उठाने में मददगार है।
चमगादड़ों से दवा बनाने में मिल सकती है मदद
दासजाक ने कहा कि इन घातक वायरसों का इंसानों में प्रसार न हो इसके लिए उन्हें जागरूक करने की जरूरत है। केन्या में लोगों को बताया जा रहा है कि अपने घरों में मौजूद छेद बंद कर दें ताकि चमगादड़ घरों में न घुस सकें, ऊंच का दूध उबाल कर पिएं आदि। उन्होंने कहा कि चमगादड़ों से लिए गए रक्त के नमूनों में एंडीबॉडी मिले हैं, जो वायरस से लड़ने के लिए बनते हैं। इन एंटीबॉडी की मदद कोविड-19 से लड़ने के लिए वैक्सी बनाया जा सकता है।

