वसई। जैन साध्वी विश्व वंदना ने यहां वर्धमान स्थानकवासी श्रावक संघ के स्थानक में अपने दैनिक व्याख्यान के दौरान कहा कि, चातुर्मास जीवन रूपांतरण का एक आध्यात्मिक प्रयत्न है ,संतो -मुनियों के नियमित सत्संग से जहां हमारी धार्मिक सोच मजबूत होती है वही व्यक्ति अपने जीवन का कायाकल्प भी कर सकता है। धर्म का कार्य केवल रूडी- रिवाज या परंपराओं का निर्वाह करना ही नहीं है बल्कि अपने विकार और कषाय ऊपर विजय प्राप्त करके सात्विक जीवन जीना धर्म की मूल प्रेरणा है ।धर्म का उपयोग केवल पापों को धोने के लिए ही नहीं बल्कि पापों से बचने के लिए किया जाना चाहिए।
साध्वी ने कहा धर्म का उपयोग केवल स्वर्ग को पाने या नर्क से बचने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जीवन की नेतिकता और सात्विकता के लिए धर्म का उपयोग होना चाहिए ।सच्चे धार्मिक वही होते हैं जो मानवता के हित में अपने स्वार्थों का त्याग करते हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कुछ लोग धंधे में भी धर्म किया करते हैं ,और कुछ लोग ऐसे भी हुआ करते हैं जो धर्म में भी धंधा किया करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल मंदिर या धर्म स्थल पर ही धर्म का आचरण नहीं होना चाहिए बल्कि उठना बैठना चलना और व्यवसाय भी धार्मिक तरीके से होना चाहिए। जिसके क्रियाकलाप नेक और पवित्र होते हैं उसकी किस्मत हमेशा मददगार बनती है।
साध्वी परमेष्ठी वंदना ने स्वभाव को निर्मल बनाते हुए क्रोध और कषाय से बचने की नेक सलाह दी ।उन्होंने कहा कि लंबा क्रोध हमारे मन में वेर की गांठ में बांध देता है, जिससे व्यक्ति अशांत तो होता ही है साथ ही उसकी सोच भी सदा अशुभ हो जाती है। वर्ष बीत जाने पर कैलेंडर उतार कर फेंक दिए जाते हैं तो हम वर्ष बीतने पर अपनी वेर की गांठों को क्यों नहीं खोल लेते ।मानवीय हितों के लिए अपनी सेवाएं समर्पित करने की प्रेरणा देते हुए संत प्रवर ने छोटे-छोटे सहयोग करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि भले ही हम लाखों का दान न दे सके ,पर दीन दुखियों के लिए अपनी छोटी छोटी सेवाएं तो समर्पित कर ही सकते हैं।
इस अवसर पर वसई संघ के अध्यक्ष मांगीलाल बोल्या, उपाध्यक्ष नेमीचंद कोठारी, मंत्री बलवंत बाफना, कोषाध्यक्ष राजेश ठाकुर गोता, कार्यकारी सदस्य पंकज चपलोत, बाबू भाई ठाकुरगोता, प्रकाश चपलोत, निर्मल चपलोत, लाभचंद पुनमिया , महावीर नवयुवक मंडल के विनय ठाकुरगोता, पंकज शुक्ला ,संजय दुग्गड, मंगल कोठारी ,झुलेस पुनमिया, मितेश ठाकुरगोता, राकेश बोलियां, हरीश भाई ,उमेश ठाकुर गोता, आदि सदस्य ने तपस्या करने वालों की अनुमोदना की।
चातुर्मास जीवन रूपांतरण का आध्यात्मिक प्रयत्न: विश्व वंदना

