चेम्बूर, मुंबई। प्रज्ञापुंज युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद, चेम्बूर के तत्वावधान में “ब्रेन पावर V/S A.I.” विषय पर एक ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
अपने प्रेरणास्पद मंगल उद्बोधन में विदुषी साध्वीश्री निर्वाणश्रीजी ने मानव मस्तिष्क की असीम संभावनाओं का प्रभावी विवेचन करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (A.I.) के विवेकपूर्ण एवं मर्यादित उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। आपने कहा कि तनाव मस्तिष्कीय विकास का सबसे बड़ा अवरोध है। स्मरणशक्ति, एकाग्रता, तनावमुक्ति एवं सहनशीलता का विकास व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाता है।
यदि A.I. का उपयोग विवेक, नैतिकता और आत्मानुशासन के साथ किया जाए तो वह मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। डॉ. साध्वी योगक्षेमप्रभाजी ने अपने सारगर्भित वक्तव्य में A.I. के सकारात्मक पक्षों के साथ-साथ उसके संभावित दुष्प्रभावों पर भी संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। आपने कहा कि अधीरता, आलस्य, व्यग्रता एवं परावलंबी मानसिकता व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में बाधक हैं।
निरंतर मस्तिष्कीय प्रशिक्षण, सकारात्मक चिंतन तथा आत्मविश्वास के माध्यम से उज्ज्वल एवं स्वर्णिम भविष्य का निर्माण संभव है। कार्यक्रम का मंगलाचरण तेरापंथ युवक परिषद, चेम्बूर के अध्यक्ष हिमांशु गन्ना, मंत्री कपिल मेहता एवं परिषद की समर्पित टीम द्वारा किया गया। अध्यक्ष हिमांशु गन्ना ने सभी उपस्थित सहभागियों का आत्मीय स्वागत करते हुए कार्यशाला की उद्देश्यपरक भूमिका प्रस्तुत की।
कार्यशाला के दौरान ब्रेन पावर को सक्रिय एवं सशक्त बनाने हेतु अनेक रोचक, प्रभावशाली एवं व्यवहारिक अभ्यास भी करवाए गए, जिनमें उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। पूरी कार्यशाला ज्ञान, प्रेरणा एवं आत्मविकास का सशक्त संगम बन गई।
प्रेषक:निलेश राठौड़

