बोइसर। तेरापंथ समाज बोईसर का पर्यूषण महापर्व का आगाज समता भवन में हुआ। प्रथम दिवस खाद्य संयम दिवस के रूप में आयोजित किया गया। प्रवक्ता उपासक श्रीमान पुखराज जी धोखा ने पर्युषण की महत्ता बताते हुए कहा – आत्मा की उपासना ही पर्युषण की विशिष्ट साधना है। यह विशुद्ध आध्यात्मिक पर्व है। क्रोध को नष्ट करने का महान अवसर है पर्युषण। भय, शोक , घृणा से मुक्त होने का अवसर है पर्युषण मैत्री के मंत्र को गुनगुनाने का उपक्रम है पर्युषण।
उपासक श्रीमान मीठालाल जी भोगर ने कहा- आमाशय भोजन का संग्रहालय है, कबाड़ खाना नहीं कि जहां जब जैसी चीज मिले उसमें डालते जाए अधिक खाने का अर्थ है- अपनी मृत्यु के वारंट पर हस्ताक्षर करना वस्तुत: ऐसे लोग अपना अहित स्वयं करते हैं हल्के एवं घटिया किस्म के कोयला से इंजिन के का पूर्जे खराब हो जाते हैं उनकी कार्य क्षमता घट जाती है। यही स्थिति शरीर की होती है यदि पेट में अनावश्यक कुछ भी डाला जाए। बेमेल और बेलगाम खाना स्वास्थ्य एवं संस्कृति दोनों के लिए हानिकारक है।
इससे पूर्व मंगलाचरण तेरापंथ महिला मंडल बोईसर ने किया। प्रथम दिवस श्रावकों की अच्छी उपस्थिति रही यह जानकारी चंद्र प्रकाश सोलंकी बोईसर ने दी।


