- जयाचार्य के आयाम तेरापंथ को वरदान है: प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा
विकास धाकड़/सूरत। सिटीलाइट तेरापंथ भवन में समायोजित जयाचार्य के निर्वाण दिवस पर अपने उद्गार में प्रोफेसर डॉ साध्वीश्री मंगलप्रज्ञा जी ने कहा-तेरापंथ धर्मसंघ के देदीप्यमान, स्वाध्याय प्रेमी मंत्र विज्ञाता और मंत्र प्रयोक्ता श्रीमद् जयाचार्य ने तेरापंथ संघ को नया रूप देकर जनसम्मान बनाया। वे सूर्य की तरह सदैव ज्ञान का प्रकाश बांटते रहे। उन्होंने श्रुत सम्पदा से भेक्षवगन को समृद्ध बनाया है। शुक्र जैसा चमकता तेजस्वी सूर्य एक दिन अस्त हो गया। आज निर्वाण दिवस स्वाध्याय-संकल्प की प्रेरणा दे रहा है। तेरापंथ संघ का महामना जयाचार्य का अनन्त उपकार है विविध प्रभावक मंत्रों से ग्रंथित विघ्ननिवारक गीतिकाएं सुरक्षा -कवच की तरह है।
प्रो. डॉ साध्वी मंगलप्रज्ञा जी द्वारा अश्रुत, जयाचार्य जीवन संबन्धित – घटना प्रसंगों का सांगोपांग वर्णन किया गया । डॉ. साध्वी चेतन्य प्रभा जी ने कहा- जब-विचार चिन्तन और साहित्य जीवन विकास को राजमार्ग है। साध्वी सुदर्शन प्रभा, साध्वी अतुलयशा साध्वी राजुल प्रभा साध्वी चैतन्यप्रभा और शौर्य प्रभा ने -जयाचार्य – जय हो जय गीत का संगान किया।
इस अवसर पर जयपुर से सेवार्थ समागत साध्वी श्री मंगल प्रज्ञा जी की संसार पक्षीय माता जी श्रद्धा की प्रतिमूति, महादानी सुमंगलसाधिका श्राविका श्रीमती भीखी देवी सेठिया का तेरापंथ समाज सूरत द्वारा सम्मान किया गया। सभा मंत्री महेन्द्र जी गांधी मेहता ने आध्यात्मिक विकास की मंगलकामना की। श्रीमती भीखी देवी सेठिया की पुत्री मानकदेवी छाजेड़ ने कहा हमारी माँ हमारी प्रेरणा और ‘आदर्श है । पूरे परिवार की ओंर से उन्होंने सूरत तेरापंथ समाज एवं सभी संस्थाओं के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन साध्वी अतुलयशा जी ने कुशलता पूर्वक किया.!

