मुजफ्फरपुर। जो भरा नहीं है भावों से, जिसमें बहती जिसमें रसधार नहीं। वह हृदय नहीं है पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।’
प्रख्यात कवि मैथलीशरण गुप्त की कविता बिहारी लाल शिव आर्यण पर पूरी तरह सटीक बैठती है। बिहार के मुजफ्फरपुर में अचानक चमकी बुखार का कहर टूटा और कई मासूमों के प्राण ले लिये। विषेशकर इस बीमारी ने वहाँ अपना विकराल रुप दिखाया जहाँ मलिन बस्ती थी और कुपोषित बच्चे। बीमारी की मुख्य वजह बनी उनके अभिभावकों में जागरूकता की कमी थी। निसंदेह ये बिमारी अभी भारत सरकार के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है लेकिन जो अभिभावक अपने बच्चे को समय रहते अस्पताल लेकर पहुंचे गये उन्हें तो बचा लिया गया लेकिन जो लोग ओझा-गुणी,झाड-फूंक के चक्कर में पड़े रहें उन्होंने अपने कलेजे के टुकड़े को गंवा दिया। डाक्टरों की माने तो इसके बचाव का बेहद सहज तरीका था। बीमारी प्रभावित बच्चों को तौलिया से पूरे शरीर को पोछना, ज्यादा बुखार होने पर कालपोल दवा देना, शरीर में पानी की कमी न हो इस वजह से ओरआरएस और गुलकोज का घोल देना। तुंरत अस्पताल लेकर पहुँचना।
इस बुरे वक्त में कई सामाजिक संगठनों और नामचीन लोगों ने जागरूक फैलाने और प्रारंभिक इलाज का साजो समान मुहैया कराया। इसमें एक नाम ‘शिव आर्यन’ का है। शिव आर्यण मूल रुप से बिहार के रहने वाले हैं। हिन्दी सिनेमा में अभिनय करते हैं। इनकी प्रतिभा का आकलन इस तरह किया जा सकता है कि इन्होंने हिन्दी सिनेमा के बडे स्टार अमीताभ बच्चन, सलमान खान जैसे लोगों के साथ काम किया है । राजकुमार संतोषी की आने वाली फिल्म ‘बैड बाँय’ में ये प्रमुख भूमिका में दिखेंगे। इस फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती के बेटे भी हैं। शिव आर्यण जितने बेहतर अभिनेता हैं उससे बडे नरम दिल इंसान भी हैं। इनकी दिल सदैव मानवता के लिए धड़कता रहता है। उनके इस नेक पहल को देखकर बिहार के प्रख्यात एकटीविस्ट हेमंत कुमार और मुजफ्फर में कई बर्षों से सामाजिक आंदोलन के चेहरा बने लोग भी शामिल होते गये। शिव आर्यण ने चमकी प्रभावित क्षेत्र में थर्मामीटर, कालपोल दवा, गुलकोज, ओआरएस, तौलिया माँक्स का वितरण करवाया। पटना के वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव भी इसका हिस्सा बने। जिन इलाको में इनकी राहत टीम गयी लोगों ने जमकर तारीफ की।
बिहार के ‘चमकी बुखार’ पीड़ितों के बीच राहत ब बचाव कार्य

