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भारत को डिफेंस टेक्नॉलजी देगा US

Last updated: June 9, 2019 6:08 pm
Surabhi Saloni
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3 Min Read
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नई दिल्ली:सशस्त्र डोन्स बेचने की मंजूरी देने के बाद अमेरिका अब भारत के साथ महत्वपूर्ण मिलिट्री टेक्नॉलजी और गोपनीय सूचनाएं साझा करने के फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है। यह व्यवस्था कुछ इस तरह से तैयार की जाएगी जिससे अमेरिकी रक्षा कंपनियां भारतीय प्राइवेट सेक्टर को संयुक्त उपक्रम के तहत अहम टेक्नॉलजी ट्रांसफर कर सकें। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस फ्रेमवर्क में विशिष्ट उपायों का जिक्र होगा जिससे भारतीय कंपनियों के साथ साझा की गई संवेदनशील टेक्नॉलजी और गोपनीय सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
फिलहाल, भारतीय प्राइवेट सेक्टर के साथ अमेरिकी कंपनियों के गोपनीय रक्षा सूचनाएं शेयर करने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि दोनों देश महत्वपूर्ण मिलिट्री प्लैटफॉर्म्स के संयुक्त विकास के पक्षधर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि दोनों देश महत्वपूर्ण मिलिट्री टेक्नॉलजी साझा करने के लिए विशिष्ट रूपरेखा पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गवर्नमेंट टु गवर्नमेंट फ्रेमवर्क से जवाबदेही, बौद्धिक संपदा अधिकार और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता आएगी। गौरतलब है कि अमेरिकी रक्षा उद्योग मिलिट्री हार्डवेयर और प्लैटफॉर्म्स के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र की भारतीय रक्षा कंपनियों के साथ समझौते की रूपरेखा चाहता है।
बोइंग और लॉकहीड मार्टिन जैसी अमेरिका की बड़ी रक्षा कंपनियां भारत के साथ अरबों डॉलर के समझौते पर नजरें गड़ाए हुईं हैं। US ने भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उपक्रम में कुछ प्रमुख सैन्य प्लैटफॉर्म का भारत में ही निर्माण करने की पेशकश की है।
पिछले महीने लॉकहीड मार्टिन ने भारत में अपने नवीनतम लड़ाकू विमान F-21 बनाने की पेशकश की थी। इस अमेरिकी रक्षा कंपनी ने यह भी कहा कि अगर भारत 114 विमानों के ऑर्डर देता है तो वह किसी अन्य देश को यह विमान नहीं बेचेगी।
US-इंडिया बिजनस काउंसिल (USIBC) भी भारतीय कंपनियों के साथ महत्वपूर्ण टेक्नॉलजी साझा करने के लिए रूपरेखा बनाने का दबाव बना रही है। एक अधिकारी ने कहा कि कई अमेरिकी कंपनियों की नजरें भारत में मेगा प्रॉजेक्टों पर हैं लेकिन वे भारतीय प्राइवेट सेक्टर के साथ शेयर की जाने वाली महत्वपूर्ण टेक्नॉलजी की सुरक्षा को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।
गौरतलब है कि स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप मॉडल के तहत प्राइवेट फर्म्स विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी कर भारत में सबमरीन और लड़ाकू विमान जैसे मिलिट्री प्लैटफॉर्म्स का निर्माण कर सकती हैं। भारत और अमेरिका के रक्षा संबंध मजबूत हैं और दोनों देश इसे आगे बढ़ाने को लेकर प्रतिबद्धता जता चुके हैं। आपको बता दें कि जून 2016 में अमेरिका ने भारत को ‘मेजर डिफेंस पार्टनर’ का दर्जा दिया था।

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