यूपी ब्यूरो, प्रयागराज। वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक और गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर अपने विवादित बयान के कारण सुर्खियों में हैं। उनके हालिया बयान, जिसमें उन्होंने अविवाहित लड़कियों की शादी की उम्र और उनके चरित्र को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की, ने देशभर में तीव्र विरोध को जन्म दिया है। मथुरा, प्रयागराज, लखनऊ और भोपाल सहित कई शहरों में महिलाओं, सामाजिक संगठनों और अधिवक्ताओं ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस घटना ने न केवल सामाजिक बहस को हवा दी है, बल्कि धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाए हैं।विवाद का कारणअनिरुद्धाचार्य ने एक धार्मिक सभा के दौरान लड़कियों की शादी की उम्र को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि “25 साल की उम्र तक लड़कियां पूरी तरह परिपक्व हो जाती हैं और उनकी जवानी उड़ जाती है।” इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि “14 साल की उम्र में शादी कर देने से लड़कियां परिवार में घुल-मिल जाती हैं, लेकिन 25 साल की उम्र तक वो चार जगह मुंह मार चुकी होती हैं।” इस बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक और रूढ़िगत मानते हुए तीखी आलोचना शुरू हुई। कई लोगों ने इसे न केवल लैंगिक रूप से असंवेदनशील, बल्कि भारत में बाल विवाह को बढ़ावा देने वाला और कानून के खिलाफ बताया, क्योंकि देश में लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष है।
मथुरा में इस बयान के खिलाफ सबसे मजबूत प्रतिक्रिया देखने को मिली। मथुरा बार एसोसिएशन की महिला अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया और अनिरुद्धाचार्य का पुतला फूंका। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा और सचिव शिव कुमार लवानिया ने इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाई। महिला अधिवक्ता प्रियदर्शनी मिश्रा ने इसे “यौनाचार की श्रेणी में आने वाला बयान” करार देते हुए CJM कोर्ट में मुकदमा दायर करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान नारे जैसे “महिलाओं का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” और “अनिरुद्धाचार्य माफी मांगो” गूंजे। अधिवक्ताओं ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) श्लोक कुमार को शिकायती पत्र सौंपकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने और कथावाचक को सार्वजनिक माफी मांगने के लिए बाध्य करने की मांग की। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास की प्रदेश अध्यक्ष गुंजन शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “ऐसे बयान आध्यात्मिक व्यक्ति को शोभा नहीं देते।” वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के याचिकाकर्ता पंडित दिनेश फलाहारी ने भी इस टिप्पणी की निंदा की और माफी की मांग की। प्रयागराज और अन्य शहरों में आक्रोशप्रयागराज में भी महिलाओं ने शनिवार को अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ मोर्चा खोला। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके बयान को नारी विरोधी और सामाजिक दृष्टिकोण को पीछे ले जाने वाला बताया। सोशल मीडिया पर भी उनकी टिप्पणी की जमकर आलोचना हुई। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय और शिवसेना नेत्री प्रियंका चतुर्वेदी ने इस बयान को शर्मनाक करार देते हुए कार्रवाई की मांग की। लखनऊ और भोपाल में भी विरोध प्रदर्शन देखे गए, जहां महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “ऐसे बयान महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं और समाज में गलत संदेश देते हैं। सिर्फ माफी पर्याप्त नहीं है, सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।” आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया और कथावाचक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सोशल मीडिया पर अनिरुद्धाचार्य को व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा। कई यूजर्स ने उनके बयान को “घटिया” और “मानसिक विकृति” का प्रतीक बताया। एक यूजर ने लिखा, “जो व्यक्ति धर्म की गद्दी पर बैठकर महिलाओं के लिए इतनी गंदी सोच रखता हो, उसे कथावाचक नहीं, ‘कथित भोगवाचक’ कहा जाना चाहिए।” समाजवादी पार्टी ने इसे सामाजिक मूल्यों के खिलाफ बताया, जबकि अन्य यूजर्स ने इसे “महिलाओं का अपमान” और “संस्कृति के खिलाफ” करार दिया। विवाद बढ़ने के बाद अनिरुद्धाचार्य ने एक वीडियो जारी कर माफी मांगी। उन्होंने दावा किया कि उनका वीडियो गलत तरीके से प्रचारित किया गया और कुछ शब्दों को AI के जरिए हटाकर इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। उन्होंने कहा, “मैं नारी का अपमान नहीं कर सकता। मेरी बात को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।” हालांकि, उनकी इस माफी को कई लोगों ने अपर्याप्त माना, और विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे।
यह पहली बार नहीं है जब अनिरुद्धाचार्य अपने बयानों के कारण विवादों में घिरे हैं। 2022 में उन्होंने महिलाओं की सुंदरता को लेकर टिप्पणी की थी, जिसमें कहा था कि “अत्यधिक सुंदरता महिलाओं के लिए दोष है।” 2024 में भगवान शिव को “कृष्ण का साला” कहने पर भी उन्हें संत समाज के विरोध का सामना करना पड़ा था, जिसके लिए उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी। उनकी हास्यपूर्ण टिप्पणियां, जैसे बिस्किट को “विस-की-किट” कहना, उन्हें सोशल मीडिया पर लोकप्रिय बनाती हैं, लेकिन उनकी महिलाओं और धार्मिक विषयों पर टिप्पणियां अक्सर लैंगिक भेदभाव और रूढ़ियों को बढ़ावा देने का आरोप झेलती हैं। मथुरा बार एसोसिएशन ने साफ किया कि यदि प्रशासन सोमवार तक अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं करता, तो वे कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल करेंगे। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा ने कहा, “ऐसे बयान समाज में जहरीली मानसिकता फैलाते हैं। प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”
अनिरुद्धाचार्य के विवादित बयान पर बवाल, महिलाओं ने खोला मोर्चा

