नई दिल्ली. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने भारत को आर्थिक मोर्चे पर झटका दिया है। रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर्स सर्विस ने भारत की रेटिंग घटा दी है। एजेंसी ने भारत के बारे अपने आउटलुक यानी नजरिए को ‘स्टेबल’ (स्थिर) से घटाकर ‘नेगेटिव’ कर दिया है। इसकी वजह कम आर्थिक वृद्धि को वजह बताया गया है। मूडीज के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था सुस्त है। इस वजह से धीमी अर्थव्यवस्था को लेकर जोखिम बढ़ रहा है। ऐसे में आर्थिक मंदी को लेकर चिंताएं लंबे समय तक रहेंगी, नई नौकरियां नहीं पैदा होगी और कर्ज बढ़ेगा।
क्या होगा असर
वैश्विक स्तर पर भारतीय अर्थव्यवस्था के नकारात्मक अनुमान से देश में विदेशी निवेश पर सीधा असर पड़ेगा। यह भारत सरकार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि भारत की ओर से पीएम मोदी लंबे वक्त से देश में विदेशी निवेश को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए भारत सरकार की तरफ से करीब हर एक सेक्टर में एफडीआई में छूट दी गई है। साथ ही भारत में 500 मिलियन डॉलर (करीब 3500 करोड़ रुपए) का निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को केंद्र सरकार की तरफ से रिलेशनशिप मैनेजर मुहैया कराने की बात कही गई थी, जो देश में भारी निवेश करने वाले निवेशकों की कानूनी रुकावटों को तत्काल प्रभाव से कम करने का काम करेंगे।
रेटिंग एजेंसियां घटा रही भारत की जीडीपी ग्रोथ
वाजिब है कि केंद्र की मोदी सरकार साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जीडीपी ग्रोथ बढ़ाने पर जोर दे रही है। लेकिन दुनिया भर की रेटिंग एजेंसियां भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा रही हैं। पिछले माह मूडीज ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए ग्रोथ रेट अनुमान घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया है, पहले इसका जीडीपी ग्रोथ अनुमान 6.2 फीसदी था। वहीं मूडीज ने वित्त वर्ष 2020-21 में ग्रोथ रेट बढ़कर 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। मूडीज को उम्मीद है कि यह आंकड़ा आने वाले सालों में बढ़कर 7 फीसदी तक पहुंच जाएगा।
देश में रोजगार के मोर्चे पर चुनौती
अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ सस्टेनेबेल इम्प्लॉयमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले छह साल में देश में रोजगार में 90 लाख की गिरावट आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आज़ाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार है जब रोजगार में इस तरह की गिरावट देखी गई है। आंकडे साल 2011-12 और 2017-18 के बीच के हैं।

