कराड। साध्वी श्री अणिमाश्रिजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सानिध्य में अणुव्रत प्राध्यापक साशन श्री मुनि श्री सुखलालजी स्वामी की स्मृति सभा का आयोजन किया गया। धारावी, ठाणे के श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित थे।
साध्वी अणिमाश्रीजी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा तेरापंथ धर्मसंघ के एक उदीयमान संत मुनि सुखलालजी अपने आप मे प्रेरणा के अद्भुत पुष्प थे। उनकी साहित्यिक मेधा ने संघ के भंडार को वर्धमानता दी। अनेक उभरती प्रतिभाओं को मुखर करने का अवकाश देने वाले संत ने अपनी प्रलंब संयम साधना को उर्जाबलता प्रदान की। अणुव्रत प्राध्यापक साशन श्री की आत्मा निरन्तर आध्यात्मिक आरोहण करती रहे।
साध्वी श्री ने कहा आज नवोदित सभा धारावी के पदाधिकारी एवं सदस्य अच्छी संख्या में तीन दिन की रास्ते की सेवा के लिए उपस्थित हुए है। पहली बार विहार में संभागी बनकर अपने उत्साह को मुखर कर रहे है। सभाध्यक्ष सुनील मंत्री अशोक पूरी टीम सक्रिय, जागरूक एवं दायित्त्वशील है।
साध्वी मंगलप्रज्ञाजी ने कहा अणुव्रत के प्रति सर्वात्मना साशन श्री मुनिश्री की हम गुणोतकीर्तना कर रहे है। वे धुन के धनी थे। उनकी काम करने की लगन आने वाली पीढ़ियों को प्रोत्साहित करती रहेगी। वे जीवन भर अणुव्रत के झंडे को थामे रहे। उनकी काव्य स्फुरणा भी गजब थी। काव्यचेता मुनिश्री को शत शत नमन।
साध्वी कर्णिकाश्रीजी, साध्वी सुधाप्रभाजी, साध्वी समत्वयशाजी, साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने गीत का संगान किया। धारावी सभा के अध्यक्ष सुनील सिंघवी ने मुनिश्री को श्रद्धा सुमन अर्पित किया एवं कहा धारावी सभा साध्वी श्रीजी के देन है। उन्ही की प्रेरणा से हम एकजुट होकर सभा का गठन कर पाए। आप समय-समय पर हमें जागरूक करती रहती है। आज हम समूहबद्ध पहली बार इतनी दूर साधु-साध्वियों के रास्ते की सेवा में आये है। आप सभी से हमें नई ऊर्जा प्राप्त हुई है, मन करता है कुछ दिन और रहकर हम रास्ते की सेवा करें। हम सब यही निवेदन करते है कि आपने जो हमारे क्षेत्र में बीज लगाया है उसको दूर बैठे भी सिंचन देते रहना।
सभा मंत्री अशोक धाकड़, ने ठाणा के उपासक धनराज भटेवरा, कांता श्रीश्रीमाल ने विचार रखे। रेखालाल चौराड़िया, बाबूलाल सियाल, धीरज धोका, सुनील सिंघवी, अशोक धाकड़, मोहन कांकरिया, महेंद्र धोका, प्रवीण धोका, धनराज भटेवरा, सुशीला भटेवरा, अमरावदेवी सेठिया, कांता श्रीश्रीमाल, भीखीदेवी सेठिया की उपस्तिथि रही।
अणुव्रत के प्रति सर्वात्मना समर्पित थे साशन श्री मुनि सुखलालजी – साध्वी अणिमाश्रिजी

