- आत्मावलोकन का पर्व है पर्यूषण- मुनि पुलकित कुमार
चेन्नई। युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य डॉ मुनिश्री पुलकित कुमारजी ने पर्यूषण का महत्व बताते हुए कहा जैन धर्म में सर्वाधिक महत्वपूर्ण महापर्व पर्यूषण है। चातुर्मास काल का सबसे महत्वपूर्ण अंग इसे माना गया है। पर्यूषण मनाने की परंपरा तीर्थंकर भगवान श्री महावीर स्वामी से चली आ रही है।
आज सामायिक दिवस के संदर्भ में मुनि श्री ने कहा सामायिक का मतलब है समत्वभाव में रमन करना। यह स्वभाव परिवर्तन और आत्म चिंतन की प्रक्रिया है। भगवान महावीर के प्रमुख श्रावक पूनिया की सामायिक पूरे जैन धर्म में प्रसिद्ध और विशिष्ट थी। इसी तरह श्रावक समाज भी 48 मिनट की इस धर्म उपासना को नित्य प्रतिदिन करने का प्रयास करें। स्वयं के जीवन के जितने दिन आपने बीताएं हैं उतने दिवस की एक सामायिक के रूप में आराधना करने का आज संकल्प करें। राग द्वेष पर विजय प्राप्त करने के लिए सामायिक की आराधना अति आवश्यक बताई गई है। नचिकेता मुनि आदित्य कुमार ने सामायिक दिवस पर गीत प्रस्तुत करते हुए अभिनव सामायिक का प्रयोग करवाया।
मंगलाचरण तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष कोमल डागा के साथ सदस्यों ने प्रस्तुत किया। माधावरम तेरापंथ महिला मंडल ने सामायिक दिवस पर गीत प्रस्तुत किया। तेरापंथ सभा अध्यक्ष महेंद्र मांडोत समेत अनेक श्रावक श्राविकाओं ने आज चंदनबाला तेले का प्रत्याख्याण मुनि श्री से किया।

