मुंबई। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद किलपौक चेन्नई के तत्वावधान में अभिनव सामयिक का अद्भुत रूप साध्वी श्री उदितयशा जी ने सामयिक दिवस के अवसर पर फरमाया कि जब हम आत्मा-राज्य की मर्यादा का उल्लंघन करते हैं, तब विषमता में चले जाते हैं। वहीं, जब हम मर्यादा की सीमा में रहते हैं, तो समता में स्थित रहते हैं। सामयिक हमें इसी समता और आत्मिक संतुलन की ओर ले जाने का मार्ग दिखाता है।
साध्वी श्री संगीतप्रभा जी ने अभिनव सामयिक का अद्भुत एवं प्रभावशाली प्रयोग करवाया। साध्वी श्री भव्ययशा जी एवं साध्वी श्री शिक्षाप्रभा जी ने नमस्कार महामंत्र की महत्व पर सुमधुर गीतिका का संगान किया।।
समता का साधक स्वतंत्र होता है परतंत्र नहीं होता: साध्वी श्री उदितयशा जी

