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Reading: आईसीसी की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा- जो पहले ही हार मान लेता है उसे नए अवसर नजर नहीं आते
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आईसीसी की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा- जो पहले ही हार मान लेता है उसे नए अवसर नजर नहीं आते

Last updated: June 11, 2020 11:56 am
Surabhi Saloni
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6 Min Read
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कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) के एनुअल प्लेनरी सेशन में कहा कि आईसीसी ने अपने गठन के बाद से आजादी की लड़ाई को देखा है, जिया है। किसी कसौटी से हम कैसे निपट रहे हैं। मुश्किलों से कैसे निपट रहे हैं, ये आने वाले अवसरों को भी तय करता है। हमारे यहां कहा जाता है कि मन के हारे हार, मन के जीते जीत। यानी हमारी इच्छा शक्ति ही हमारा आगे का मार्ग तय करती है। जो पहले ही हार मान लेता है उसके सामने नए अवसर नजर नहीं आते, लेकिन जो जीत के लिए प्रयास करता है उसके सामने नए अवसर भी उतने ही ज्यादा आते हैं।

यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रहा है। 10 दिन में ये दूसरा मौका होगा जब मोदी इंडस्ट्री के लोगों से जुड़े हैं। इससे पहले उन्होंने 2 जून को कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के एनुअल सेशन में इकोनॉमी पर बात की थी।

अपडेट्स…

  • मोदी ने कहा इस बार की एजीएम ऐसे समय हो रही है जब हमारा देश मल्टीपल चैंलेजेस को फेस कर रहा है। कोरोना वायरस से पूरी दुनिया लड़ रही है। भारत भी लड़ रहा है, लेकिन अन्य तरह के संकट भी निरंतर खड़े हो रहे हैं।
  • ये हमारी एकजुटता, मिलकर बड़ी से बड़ी आपदा का सामना करना, ये हमारी इच्छाशक्ति है, एक राष्ट्र के रूप में बहुत बड़ी ताकत है। मुसीबत की एक ही दवाई है- मजबूती। मुश्किल समय ने हर बार भारत के डिटरमेनेशन को मजबूत किया है। देशवासियों के संकल्प को ऊर्जा दी है।
  • आत्मनिर्भरता का यह भाव वर्षों से हर भारतीय ने एक एस्पिरेशन की तरह जिया है। फिर भी एक बड़ा काश भारतीयों के मस्तिष्क में रहा है कि काश हम मेडिकल, डिफेंस, कोल-मिनरल, फर्टिलाइजर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होते। काश हम इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग, सोलर पैनल, चिप, एविएशन सेक्टर में भी आत्मनिर्भर होते। ऐसे कितने सारे काश हमेशा से हर भारतीय को झकझोरते रहे हैं।
  • पिछले 5-6 वर्षों में देश की रीति-नीतियों में भारत की आत्मनिर्भरता का लक्ष्य सर्वोपरि रहा है। कोरोना काल ने हमें इसकी गति और तेज करने का सबक दिया है। इसी सबक से निकला है आत्मनिर्भर अभियान।
  • हम देखते हैं कि परिवार में भी बेटा-बेटी 18-20 साल का हो जाता है तो मां-बाप कहते हैं कि अपने पैरों पर खड़े होना सीखो। एक तरह से आत्मनिर्भर भारत का पहला पाठ परिवार से ही शुरू होता है। आत्मनिर्भर भारत अभियान का सीधा सा मतलब है कि भारत दूसरे देशों पर अपनी निर्भरता कम से कम करे। हर वो चीज जिसे इंपोर्ट करने के लिए देश मजबूर है वो भारत में ही कैसे बने।
  • हर वो सामान जो भारत का लघु उद्यमी बनाता है। जो सामान हमारे सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़े करोड़ों गरीब बनाते हैं, उसे छोड़कर विदेश से वही सामान मंगवाने की प्रवृत्ति पर भी हमें कंट्रोल करना है।
  • हम इन छोटे-छोटे व्यापार करने वाले लोगों से चीजें ही नहीं खरीदते, बल्कि उन्हें पुरस्कृत भी करते हैं। हमें इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि इससे वे कितना गर्व महसूस करते हैं। इसलिए लोकल के लिए वोकल होने का समय है। हर गांव, हर कस्बे, हर जिले, हर प्रदेश और पूरे देश को आत्मनिर्भर करने का समय है।
  • देश प्रण कर चुका है और कदम भी उठा रहा है। आत्मनिर्भर भारत के तहत जिन बड़े रिफॉर्म की घोषणा की गई, उन्हें तेजी से जमीन पर उतार जा रहा है। एमएसएमई के लिए हजारों करोड़ के फंड की जरूरत हो या प्रोजेक्ट डेवलपमेंट सेल का गठन हो, ये काम हो रहे हैं। तमाम सेक्टर के लिए जो रिफॉर्म हो रहे हैं, उनका फायदा उठाने के लिए उद्योग जगत और युवा आगे आएं।
  • भारत के किसानों को अपनी उपज अब कहीं भी बेचने की इजाजत मिल गई है। एसेंशियल कमोडिटी एक्ट में जो संशोधन किए गए हैं, उससे किसानों को फायदा होगा। इन फैसलों ने किसान को एक प्रोड्यूसर और उपज को एक प्रोडक्ट के रूप में पहचान दी है।

2019-20 में जीडीपी ग्रोथ 4.2%, 11 साल में सबसे कम
उद्योग संगठनों के कार्यक्रमों में मोदी का शामिल होना इसलिए भी अहम है, क्योंकि कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से देश की इकोनॉमिक ग्रोथ रुक गई है। जनवरी-मार्च में जीडीपी ग्रोथ घटकर 3.1% रह गई। पूरे फाइनेंशियल ईयर (2019-20) में ग्रोथ सिर्फ 4.2% रही, ये 11 साल में सबसे कम है।

मोदी को इकोनॉमिक ग्रोथ लौटने का भरोसा
मोदी ने कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री के प्रोग्राम में कहा था कि ग्रोथ जरूर लौटेगी और अनलॉक-1 के साथ इसकी शुरूआत हो गई है। सरकार को किसानों, छोटे-मध्यम उद्योगों और इंडस्ट्री लीडर पर भरोसा है। कोरोना के खिलाफ इकोनॉमी को फिर से मजबूत करने पर फोकस किया जा रहा है।

‘दुनिया को भारत से उम्मीदें, इंडस्ट्री को फायदा उठाना चाहिए’
मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अब मेड इन इंडिया, मेड फॉर वर्ल्ड की जरूरत है। लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ानी होगी। दुनिया एक भरोसेमंद पार्टनर की तलाश में है और भारत को लेकर भरोसा बढ़ा है। इंडस्ट्री को इसका फायदा उठाना चाहिए।

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