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lifestyle

कहीं आपको भी यह खुशफहमी तो नहीं कि आप बहुत बिजी हैं !

Last updated: June 11, 2020 10:23 pm
Surabhi Saloni
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6 Min Read
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पूनम जैन।।
मस्त रहना है तो व्यस्त रहना सीखें। यही कहा जाता है। बात भी गलत नहीं है। लेकिन हम व्यस्त तो बहुत दिखते हैं, मस्त नहीं। दरअसल हम अस्त-व्यस्त ज्यादा होते हैं। बिजी होना और माहिर होना एक बात नहीं है। बिजी दिखने से ज्यादा जरूरी है प्रोडक्टिव होना…
तुम तो बिजी ही होंगे! यह कहकर दोस्त तो सरक गया। पर सुनने वाले का सुकून भी चला गया। यूं तो आजकल सभी बहुत बिजी होते हैं। बिजी दिखना एक फैशन सा भी बन गया है। कुछ देर के लिए खास होने का एहसास भी दिला सकता है। लेकिन ज्यादातर लोग अपने बिजी होने की दुहाई देने को मजबूर दिखते हैं और यह चुभता है। शोध तो कहते हैं कि बिजी होना सफल होना भी है, यह कोरा भ्रम है। सफलता के लिए हर समय व्यस्त रहने या दिखने की जरूरत नहीं है।
‘गेट इट टुगेदर’ की लेखिका लॉरेन बर्जर मानती हैं, ‘बिजी होना, काबिल होने का तमगा नहीं है। काबिल वे होते हैं, जिनकी अपने काम और समय पर पकड़ होती है।’ ऐसे में खुद से यह सवाल पूछते रहना जरूरी है कि आप किस कारण इतने बिजी हैं? यूं जुटे रहना जीवन में क्या सुधार ला रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि आप बेकार के कामों में अटके रहते हैं?
काम के साथ हमारी पसंद और खुशी भी मायने रखती है। आंकड़े बताते हैं कि 75 फीसदी माता-पिता के पास रात में बच्चों से ढंग से बात करने का समय नहीं होता। बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जो छुट्टियों में कहीं जाने का समय नहीं निकाल पाते। तनाव और काम के बोझ के कारण 40 फीसदी लोग हर समय नींद की कमी से जूझते हुए दिखते हैं।
होशियारी से काम करें- 
कुछ लोगों के पीछे काम दौड़ता है, तो कुछ काम के पीछे दौड़ते रह जाते हैं। कुछ के पास हर जरूरी काम के लिए समय होता है तो कुछ हमेशा घड़ी की सुइयों के साथ भागते रहते हैं। एक कंज्यूमर रिसर्च के अनुसार, लोगों को लगता है कि समय की कमी है। सच यह है कि वे काम कम करते हैं। रुटीन कामों में ज्यादा समय खर्च करते हैं। तैयारी की कमी के कारण ऐन मौके पर उनके काम फैले रहते हैं।  इस वजह से उनके काम देर से खत्म होते हैं। बिजी होना उनकी खुशी या रुतबा नहीं, उनकी मजबूरी होती है।
हमें काम अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से करना चाहिए, दूसरों की देखादेखी नहीं। हर उस काम के पीछे दौड़ने की जरूरत ही नहीं हैं, जो दूसरे कर रहे हैं। स्मार्ट फोन होने या किसी बड़े पद पर काम करने का यह मतलब नहीं कि आप 24 घंटे कॉल या मेल का जवाब देते रहें। हर खबर, हर बहस, सोशल मीडिया की हर पोस्ट की जानकारी रखें।
खुद को फ्री रखना है तो एक तो ज्यादा से ज्यादा अपनी पसंद के काम करें। दूसरा उन चीजों पर फोकस रखें, जिनसे आपको अपने कामों को करने में मदद मिलती है। बिना सोचे-समझे जुटे रहने की बजाय होशियारी से काम करें। स्मार्ट वर्क करें।
यह आपकी मर्जी है-
आप बिजी रहना चाहते हैं या नहीं, यह आपका फैसला है। बेवजह खुद को बिजी बनाए रखने वाली जीवनशैली में धकलने की जरूरत नहीं है। किस काम को ‘हां’ कहना है, यह आपको तय करना है। दूसरे क्या कहेंगे, यह सोचकर दिमाग पर बेवजह का बोझ न बढ़ाएं। हेबिट के संस्थापक लिओ बाबुटा कहते हैं, ‘हम इंसान हैं, मशीन नहीं। अपना दिन यूं तय करें कि हमारी इंसानियत भी बची रह सके।’
हम खुश तभी रहते हैं, जब काम और जीवन के बीच संतुलन होता है। काम में तरक्की जरूरी है तो मन की शांति भी। समय गिनते रहने की बजाय क्या मिल रहा है, इसका हिसाब लगाना भी जरूरी है। बेहतर है कि ज्यादा वैल्यू वाले कम काम करें। कई बार दस काम निपटाने पर भी कुछ हाथ में नहीं आता, जितना किसी एक काम को ढंग से पूरा करने पर खुशी मिलती है। किसी के लिए करियर ही सब कुछ है तो किसी के लिए अपनों का साथ होना भी जरूरी है। हमारा संतुलन कहां है, यह हमें तय करना है। हमारे पास किसी भी कामयाब इंसान के जितना ही समय है। हम बस अच्छी मंशा से अपना काम करते रहें। आखिर में, जो अपने मन का करते हैं और पूरे मन से करते हैं, वे जितने व्यस्त होते हैं, उतने ही फुरसतिए भी।
व्यस्तता का बोझ उतारें –
-सुबह कुछ मिनट दिनभर के जरूरी कामों की योजना बनाएं।
-रोज के कामों की तैयारी पहले करके रखें।
-जरूरी काम पहले करें। एक समय में एक ही काम करें।
-गैरजरूरी कामों को न कहें।
-सेहत का ध्यान रखें।
-तुलना न करें। सबको खुश करने की कोशिश न करें।
-अपनी छुट्टियों का सही इस्तेमाल करें।
-स्पष्ट बात करें। पूछने और मदद लेने में हिचकें नहीं।
-अच्छा नेटवर्क बनाएं।

Thanks:www.livehindustan.com

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