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प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस

Last updated: April 27, 2020 10:30 pm
Surabhi Saloni
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3 Min Read
File Photo
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नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने कोराना लॉकडॉउन के कारण शहरों में फंसे प्रवासी कामगारों को उनके घर भेजने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र से एक हफ्ता में जवाब मांगा है। जस्टिस एन वी रमन्ना की पीठ ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह एक हफ्ते में बताए कि क्या उसकी मजदूरों को उनके घर भेजने की कोई योजना है।

वकील प्रशांत भूषण की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि लाखों मजदूर देश के विभिन्न शहरों में फंसे हैं और उनकी बुरी हालत है। जो कामगार कोविड मुक्त हैं, उन्हें उनके घर भेजने की व्यवस्था की जाए। उनके पास पैसे खत्म हो गए हैं, काम बंद है और खाने के लाले पड़ गए हैं।

याचिका के जवाब में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ऐसे मजदूरों की चिंता कर रही है और उन्हें खाने और रहने की सुविधाएं दी जा रही हैं। सरकार उनके अधिकारों का पूरा ख्याल रख रही है। एक मात्र याचिकाकर्ता ही नहीं है जो उनकी चिंता कर रहा है।

उन्होंने कहा मजदूरों को घर भेजने से संक्रमण का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, जो संक्रमण अब तक गांवों में नहीं फैला है, उसके वहां भी फैलने का खतरा है। उन्होंने एक अंग्रेजी अखबार ने लिखी रिपोर्ट को गलत बताया और कहा कि यह गलत है कि 96 फीसदी मजदूरों को मेहनताना नहीं मिल रहा है।

रद्द फ्लाइट का पूरा किराया वापस दिलाने की याचिका पर भी नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडॉउन के कारण रद्द हुईं फ्लाइट का पूरा किराया वापस दिलाने के लिए दायर याचिका पर भी नोटिस जारी कर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से जवाब मांगा है। ये याचिका प्रवासी लीगल सेल ने दायर की है।

उन्होंने कहा कि लॉकडॉउन से पहले बुक की गईं फ्लाइट का पूरा किराया वापस नहीं किया जा रहा है। 16 अप्रैल 2020 को जारी अधिसूचना में भी यही कहा गया है कि लॉकडॉउन के दौरान बुक टिकटों का ही पूरा रिफंड किया जाएगा।जस्टिस एन वी रमन्ना की पीठ ने कहा कि यह भेदभावपूर्ण लगता है। ऐसा नहीं हो सकता की लॉकडॉउन के बाद बुक की गईं उड़ानों का ही किराया वापस किया जाएगा, पहले बुक की गईं उड़ानों का नहीं। अदालत ने सरकार से दो हफ्ते में जवाब मांगा है।

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