नई दिल्ली: भारतीय सेना के अगले सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे होंगे। यह जानकारी सोमवार को न्यूज एजेंसी ने दी। 1 सितंबर 2019 को लेफ्टिनेंट जनरल नरवाणे ने भारतीय सेना के उप-थलसेनाध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वे सेना की ईस्टर्न कमांड के प्रमुख थे। वर्तमान सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत 31 दिसंबर को रिटायर होंगे। इसके बाद 28वें सेना प्रमुख के तौर पर लेफ्टिनेंट जनरल नरवाणे पदभार ग्रहण करेंगे।
इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने सुबह एलओसी पर राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में सीजफायर का उल्लंघन किया। इसमें भारतीय जवान शहीद हो गया। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी गोलीबारी का मुंहतोड़ जवाब दिया।
ले. जनरल (रि) कुलकर्णी ने नरवाणे के बारे में बताया
वे जनरल रावत के बाद सबसे सीनियर अफसरों में से एक हैं। जनरल नरवणे ईमानदार और धीर-गंभीर अफसर हैं। नरवणे ही वे आर्मी कमांडर हैं, जिन्होंने डोकलाम संकट के समय चीन को उसकी हद बताई थी। वे अपनी त्वरित निर्णय क्षमता और कोई भी फैसला लेने से पहले अपने साथियों को सुनने की जबर्दस्त योग्यता के लिए पहचाने जाते हैं।
जब वे असम राइफल्स में इंस्पेक्टर जनरल (नॉर्थ) थे, उस वक्त मुझे उनका साथ मिला। वे सिर्फ प्रासंगिक मामलों पर फोकस करते हैं और अप्रासंगिक मामलों से विचलित नहीं होते।
मैंने उनसे सेना के आधुनिकीकरण को लेकर बात की थी, तब उन्होंने पुरजोर तरीके से हिमायत की थी कि हमें स्वदेशीकरण करना चाहिए। चूंकि हमारे पास तकनीक है, सुव्यवस्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियां हैं और निजी क्षेत्र की क्षमताएं हैं, इसलिए हमें कोई आयात नहीं करना चाहिए। हमें न सिर्फ आत्मनिर्भर होना चाहिए, बल्कि निर्यात भी करना चाहिए।
नरवणे मृदुभाषी हैं। वे जो चाहते हैं, उसे करने में अपनी पूरी योग्यता झोंकते देखा है। वे सिर्फ पेशेवर हैं और इसमें उनकी स्कूल टीचर पत्नी उतना ही सहयोग करती हैं।
(ले. जनरल (रिटायर्ड) संजय कुलकर्णी सियाचिन जाने वाले पहले सैन्य अफसर हैं)
सिख लाइट इफेंट्री रेजीमेंट से कमीशन
- 37 साल की सेवा में नरवणे जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में तैनात रह चुके हैं।
- नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी के छात्र रहे हैं।
- सेना मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से अलंकृत हो चुके हैं।
- कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन और पूर्वी मोर्चे पर इन्फैन्टियर ब्रिगेड की कमान संभाल चुके हैं।
आर्मी चीफ को चुनने में वरिष्ठता का भी बड़ा रोल
भारत सरकार आर्मी चीफ की नियुक्ति करती है। नियुक्ति के वक्त सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दूसरी आवश्यकताओं पर भी विचार किया जाता है। वरिष्ठता भी इसमें बड़ा रोल प्ले करती है। नियुक्ति को लेकर अंतिम निर्णय कैबिनेट की ‘अपॉइंमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट’ (ACC) करती है। इस कमेटी में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, रक्षा मंत्री शामिल होते हैं। चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का कार्यकाल 3 साल या 62 वर्ष की उम्र तक होता है। इन दोनों में से जो भी पहले पूरा होता है, उसी समय सेवाएं समाप्त होती हैं।

