बैंकॉक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थाईलैंड दौरे के तीसरे दिन सोमवार को 14वें ईस्ट एशिया शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। मोदी ने म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की से कहा कि दो देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी के लिए सीमाओं पर शांति बेहद अहम होती है। मोदी ने भारत-म्यांमार में ऑपरेट कर रहे विद्रोहियों के खिलाफ सू की से सहयोग की भी उम्मीद की। इस समिट के दौरान सदस्य देश क्षेत्रीय विस्तृत आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते की घोषणा कर सकते हैं। लेकिन, न्यूज एजेंसी को सूत्रों ने बताया कि भारत इस समझौते में शामिल नहीं होगा।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री का रुख इस मामले पर स्पष्ट है। समझौते के अहम मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया है और भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा। आरसीईपी समझौता अपने मूल उद्देश्य को नहीं दर्शाता है और इसके नतीजे संतुलित नहीं होंगे। सूत्रों ने बताया कि भारत ने आयात की अधिकता की सुरक्षा के लिए अपर्याप्त व्यवस्था, चीन के साथ अपर्याप्त अंतर, नियमों में बदलाव की आशंका, बाजार की अनुपलब्धता जैसे विषयों को लेकर चिंता जाहिर की थी।
आरसीईपी में कई मुद्दे अभी स्पष्ट नहीं- विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय के सचिव विजय ठाकुर सिंह ने कहा था कि भारतीय प्रतिनिधि आरसीईपी व्यापार सौदे से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को हल करने में जुटे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह बेहतर और पारदर्शी है। कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे हैं, जो अभी भी स्पष्ट नही हैं। यह मुद्दे हमारी अर्थव्यवस्था और हमारे लोगों की आजीविका के लिए बेहद जरूरी हैं।
सदस्य देश आरसीईपी पर समीक्षा करेंगे
समिट के दौरान सदस्य देश (आसियान और 6 अन्य देश) आरसीईपी पर अब तक हुई वार्ता की समीक्षा करेंगे। आरसीईपी का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना है। आरसीईपी में आसियान के 10 देश जैसे ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाईलैंड, फिलीपींस, लाओस और वियतनाम और उनके छह एफटीए साझेदार चीन, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं।
ईस्ट एशिया समिट:अहम मुद्दों पर ध्यान न दिए जाने की वजह से भारत आरसीईपी समझौते में शामिल नहीं होगा

