ठाणे। साध्वी श्री आणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सानिध्य में मुम्बई सभा के तत्त्वाधान में ठाणा तेरापंथी सभा द्वारा उपासक संबोध कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें अच्छी संख्या में उपासकों ने भाग लिया।
साध्वी श्री आणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरक संबोध में कहा उपासक श्रेणी वह श्रेणी है, जो आत्मकेंद्रित बनकर तेजस्विता के पथ का वरण कर रही है। गुरुदेव श्री तुलसी के दूरदर्शी सोच का नवनीत है उपासक श्रेणी। तेरापंथ कार्यक्रम धर्मसंघ में वर्षों से उपासक श्रेणी का अनूठा उपक्रम चल रहा है। मुम्बई में अच्छे उपासक तैयार हुए है एवं हो रहे है। ऐसा लगता है मुम्बई खान है, सैकडों की तादाद में उपासक और तैयार हो सकते है। प्रेरणा प्रोत्साहन व प्रशिक्षण की छैनी से तराशकर संघ के फ्रेम में फिट किया जा सकता है। गुणवत्ता की दृष्टि से उपासक श्रेणी में निखार आये इसीलिए प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इस दृष्टि से मुम्बई उपासक श्रेणी के संयोजक भाई सोहनलालजी कोठारी अत्यधिक जागरूक है। उपासकों की यात्रा संघ प्रभावक हो , ऐसी मंगलकामना।
साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी ने कहा स्वाध्याय जीवन ज्योति को प्रज्वलित करने वाली अप्रकम्प दिप शिखा है। स्वाध्याय करने से अल्जाइमर जैसी बीमारी से बच सकते है। उपासक स्वाध्याय के द्वारा अपनी ज्ञान चेतना को और पॉवरफुल बनाये। साध्वी सुधाप्रभाजी ने तत्वज्ञान की सरल शैली में सरस प्रशिक्षण दिया। साध्वी स्मतव्यशाजी ने संगीत का प्रशिक्षण दिया। साध्वी कर्णिकाश्रीजी ने वक्तुत्रव शैली जा प्रशिक्षण दिया।
साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी ने जैन दर्शन एवं तेरापंथ दर्शन का प्रशिक्षण बड़ी रोचक शैली में दिया। साध्वी श्री आणिमाश्रीजी ने इतिहास की विरल एवं रोचक जानकारी दी।
साध्वी सुधाप्रभाजी ने प्रश्न-प्रश्न में बोध पाए नव संबोध कार्यक्रम का संचालन किया। मंगल संगान उपासक बहनों ने किया।सभाध्यक्ष नरेंद्र तातेड़, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं उपासक बाबूलाल बाफना, ठाणा सभा के मंत्री व उपासक जितेंद्र बरलोटा ने अपने विचार प्रस्तूत किये। कुशल संचालन संयोजक सोहनलाल कोठारी ने किया।
ठाणे में उपासक संबोध कार्यशाला का आयोजन

