समणी वृन्द का स्वागत अभिनंदन
ठाणे। साध्वी श्री आणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सानिध्य में बैंगलोर गुरु-उपासना से समागत एवं लंदन तथा अमेरिका प्रस्थान करनेवाली समणी प्रतिभाप्रज्ञा जी एवं समणी हिमप्रज्ञाजी का स्वागत अभिनन्दन का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
साध्वी श्री आणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा आचार्य तुलसी का जीवन आश्चर्यों की वर्णमाला से गुम्फित महाशिलाअभिलेख है। उन्होंने अपने शाशनकाल में धर्मसंघ को महाआश्चर्यकारी अवदान दिए। उन अवदानों में एक महत्त्वपूर्ण अवदान है – समण-श्रेणी। समण-श्रेणी द्वारा जिनशाशन की अभूतपूर्व प्रभावना हो रही है। समण श्रेणी की विशिष्ठ एवं वरिष्ठ समणी है-समणी प्रतिज्ञाप्रभाजी। इन्होंने अपने श्रम से आने कर्तव्य एवं व्यक्तित्व को निखारा है। ये उधमशील समणी है। नए चिंतन एवं नव विजन के साथ नए-नए कार्यो को समायोजित करती है। बारह सालों से लंदन में रहकर अपने अध्यनन को पूरा किया है। तथा तेरापंथ धर्मसंघ की अच्छी प्रभावना कर रही है। समणी हिमप्रज्ञाजी संस्कृत की प्रकांड ज्ञाता व व्याख्याता है। जै.वी.भा संस्थान में प्रोफेसर है। अभी अमेरिका की ओर प्रस्थान करेंगी। दोनों समणी जी खूब अच्छा काम करे एवं अपनी साधना के प्रति सजग रहें। मंगलकामना। समणीजी गुरु संदेशवाहक बनकर आई है। साध्वी मंगलप्रज्ञजी ने कहा – समणी प्रतिभाप्रज्ञाजी तेरापंथ धर्मसंघ की इकलौती समणी है जिन्होंने लंदन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। ये जुझारू व्यक्तिव की धनी है। ये श्रमशील, चिंतनशील एवं विनयशील समणी है। ये जंहा भी जाति है वहा अच्छा काम कर लोगों को प्रभावित करती है। समणी हिमप्रज्ञाजी भी कर्मठ समणी है। ज्ञान का अच्छा क्षयोपशम है। यात्रा प्रभावशाली व संघप्रभावक हो। मंगलकामना। समणी जी से प्रभु चरणों के सवांद सुनकर तृप्त हो गए। समणी प्रतिभाप्रज्ञा ने कहा साध्वी आणिमाश्रीजी हमारे धर्मसंघ की प्रथम पंक्ति में अवस्थित साध्वी है। साध्वी मंगलप्रज्ञाजी ख्यातनामा साध्वी है। संघ की विशिष्ट प्रभावना आपने की है। समणा श्रेणी का आपका कालखंड स्वर्णिम कहा जा सकता है। आपने समण श्रेणी व जै.वी.भा संघ का खूब विकास किया। साध्वी आणिमाश्रीजी का पूरा सिंघाड़ा प्रबुद्ध है।
समणी हिमप्रज्ञाजी, साध्वी सुधाप्रभाजी, सभा मंत्री सुरेश बरलोटा ने अपने विचार रखे। साध्वी श्रीकर्णिकाश्रीजी ने संचालन किया। साध्वी कर्णिकाश्रीजी, साध्वी सुधाप्रभाजी,साध्वी स्मतव्यशाजी, साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
आचार्य तुलसी का विशिष्ट अवदान है -समण श्रेणी

