डॉ. तपस्विनी प्रधान।।
हमारे देश में सिर व गर्दन के कैंसर के करीब 4 लाख नए मामले हर साल सामने आते हैं। बड़ी संख्या उन मामलों की है, जो दर्ज नहीं होते। कैसे बचा जा सकता है इस कैंसर से, जानिए-
कैंसर के मामलों में सिर और गर्दन का कैंसर छठेस्थान पर है। विकासशील देशों में इसके मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। सिर और गर्दन के कैंसर के 57.5% मामले अकेले एशिया में होते हैं और उसमें से 30 प्रतिशत भारत में सामने आते हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के (आईसीएमआर) के अनुसार हर साल देश में करीब 4 लाख सिर व गर्दन के मामलों का निदान किया जाता है।
सिर और गर्दन का हिस्सा जटिल शारीरिक संरचना का होता है। नई खोज, तकनीक व दवाओं की बदौलत इस कैंसर के उपचार में कई बदलाव आए हैं। बावजूद, इसके मरीजों में चेहरा बिगड़ना, बोलने या निगलने में समस्या होने जैसे डर देखने को मिलते हैं। सामाजिक रूप से अस्वीकार किए जाने का डर भी उनमें देखने को मिलता है। कई मिथक भी हैं, जिनके कारण उपचार में देरी हो जाती है। 12.5 प्रतिशत मामले ही शुरुआती चरण में सामने आते हैं।
कारण
सिर और गर्दन का कैंसर मुख्य रूप से जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है। 80 फीसदी मामलों में तंबाकू सेवन बड़ा कारण है। तंबाकू में मुख्य कैंसरकारी तत्व टार है। तंबाकू के धुएं वाले तरीकों में लगभग 60 संभावित कैंसरकारी तत्व होते हैं, जबकि गैर धुएं वाले तरीकों में 28 कैंसरकारी तत्व होते हैं। बहुत कम उम्र से धूम्रपान करने वालों में इसके होने की आशंका ज्यादा होती है। धूम्रपान न करने वालों की तुलना में एक दिन में 20 से अधिक सिगरेट पीने वालों में इस कैंसर के होने की आशंका 5 से 25 फीसदी ज्यादा होती है।
धूम्रपान के साथ शराब पीने वालों में यह खतरा 38 फीसदी तक बढ़ जाता है। तंबाकू और एल्कोहल सेवन से म्यूकोसल इंजरी का खतरा बढ़ता है, जो दूसरे कैंसरकारी तत्वों को बढ़ावा दे सकता है, इससे डीएनए की मरम्मत प्रक्रिया में बाधा आती है। शरीर में प्रदूषक तत्व पैदा होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर बनाते हैं। सुपारी भी कैंसरकारी तत्वों में शामिल है।
कुछ वायरस जैसे एचपीवी, एचआईवी, ईबीवी और हर्पीस भी कुछकंैसर का कारण बनते हैं। ज्यादा नमक वाली प्रोसेस्ड चीजें, ग्रिल्ड व भुना हुआ मीट ज्यादा खाना भी कैंसर का कारण बन सकता है। भोजन में केरेटेनॉएड्स, फॉलिक एसिड, विटामिन्स और डाइटरी फाइबर की कमी इसके खतरे बढ़ाती है। लंबे समय तक अल्ट्रावॉयलेट किरणों व हानिकारक विकिरणों के संपर्कमें रहना भी नुकसान पहुंचाता है।
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