नई दिल्ली:उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की कार में टक्कर सुनियोजित साजिश थी अथवा यह महज हादसा ही था…। यह पता करने के लिये सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही सात दिन की समयसीमा तय की, सीबीआई ने अपनी तफ्तीश तेज कर दी। जांच एजेंसी ने 24 अफसरों की तीन टीम बनाई है। जांच एजेंसी की टीमें रायबरेली, उन्नाव और लखनऊ में अलग-अलग पड़ताल कर तथ्य जुटाने में लग गई है। इनके अलावा भी दो टीम हैं, जो लखनऊ स्थित मुख्यालय में मौजूद रहकर हर तथ्य पर अपनी रिपोर्ट तैयार करती रहेंगी। सीबीआई के एसपी राघवेन्द्र वत्स ने शुक्रवार सुबह पूरी टीम से अब तक की प्रगति पर चर्चा की, फिर सबके साथ कई बिन्दुओं पर बात कर तथ्य जुटाने को कहा। सीबीआई की केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब टीम लखनऊ पहुंच गई है।
सीबीआई ने बनाई 20 अधिकारियों की अलग टीम
केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे की जांच के लिए 20 सदस्यीय अतिरिक्त विशेष दल का गठन किया है। एजेंसी के प्रवक्ता ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। प्रवक्ता ने बताया कि इसके अलावा, केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के छह शीर्ष फोरेंसिक विशेषज्ञ पहले ही अपराध स्थल पर पहुंच चुके हैं। सूत्रों ने बताया कि फोरेंसिक टीम एक स्विफ्ट कार ले गयी है। रविवार को हुई दुर्घटना में पीड़िता इसी कार से जा रही थी। यह 20 सदस्यीय विशेष टीम लखनऊ में पांच सदस्यीय टीम की मदद करेगी जोकि मामले की पहले ही जांच कर रही है।
उन्नाव प्रकरण: सुप्रीम कोर्ट ने दुर्घटना मामले का दिल्ली स्थानांतरण फिलहाल रोका
वहीं दूसरी ओर, उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव बलात्कार कांड पीड़ित के वाहन से ट्रक की टक्कर के मामले को रायबरेली से दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित करने संबंधी अपने आदेश में शुक्रवार (2 अगस्त) को संशोधन कर दिया क्योंकि इस घटना की जांच अभी पूरी नहीं हुयी है। इस दुर्घटना में बलात्कार पीड़ित और उसका वकील बुरी तरह जख्मी हो गये थे जबकि पीड़ित के दो परिजनों की इसमें मृत्यु हो गयी थी।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने सीबीआइ्र की ओर से सालिसीटर जनरल तुषार मेहता के इस कथन का संज्ञान लिया कि पिछले रविवार को हुयी इस दुर्घटना की जांच अभी जारी है। मेहता ने कहा कि चूंकि दुर्घटना संबंधी इस मामले की जांच अभी चल रही है, इसलिए कानूनी प्रावधानों के तहत इसका स्थानांतरण नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि इसकी जांच पूरी होने तक इस मामले का स्थानांतरण विलंबित रखा जाये। शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को जांच ब्यूरो को इस मामले की जांच का काम सात दिन के भीतर पूरा करने का आदेश देने के साथ ही उन्नाव कांड से संबंधित पांच मामले दिल्ली की अदालत में स्थानांतरित कर दिये थे।

