मालेगांव (खान्देश महाराष्ट्र)। आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री राकेशकुमारी जी साध्वीश्री मलयविभा जी ,साध्वीश्री विपुलयशा जी , साध्वीश्री, जिज्ञासाप्रज्ञा जी के पावन सान्निध्य में पारस एम्पोरियम के विशाल हाल में हर्षोल्लास के साथ प्रज्ञा पुरूष आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का शताब्दी वर्ष (जन्मोत्सव ) ज्ञान चेतना दिवस के साथ मनाया गया। साध्वीश्री जी के नमस्कार महामंत्र ध्वनि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। साध्वीश्री जिज्ञासाप्रज्ञा जी ने मधुर स्वर लहरिया से मंगलाचरण प्रस्तुत कर सभा मे पुलकन भर दी।
साध्वीश्री राकेशकुमारी जी ने सभा को संबोधित करते हुए विश्व की महान विश्व विभूति , धर्मचक्रवती , करूणास्रोत आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के जीवन संबंधी रोचक घटना प्रसंगो पर प्रकाश डालते हुए कहा – अतिन्द्रिय ज्ञान के धनी आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी दिव्य विभूति थे। ज्ञान की रश्मियों से केवल हिंदुस्तान को ही नहीं पूरे विश्व को आलौकित किया। साध्वीश्री ने कहा – आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के विशाल व्यक्तित्व,यशस्वी ,वर्चस्व ,कर्मशील कर्तृत्व ,और साधना को स्याही से जो आलेख लिखे अवदान दिये वो विश्व के भाल पर दस्तावेज बन गये। आपने तप : पूत वाणी संदेश उपदेशों से युग की जीवनधारा को बदल सम्पूर्ण मानव जाति का कल्याणकारी मार्ग प्रशस्त किया। आपके जीवन का प्रकोष्ठ पल मानवता की सेवा में समर्पित था। जीवन के कण -कण से स्फूलिंग उछलतें थे। आपकी सप्तवर्षिय अंहिसा यात्रा भाईचारा ,विश्वबंधुत्व, सहअस्तित्व ,एकता , सौहार्द भाव , विश्व शांति ,स्थापित करने में तथा विश्व में अंहिसक वातावरण का निर्माण करने में प्रभावी रही है। साध्वीश्री मलयविभा जी ने कविता ,सभाध्यक्ष मदनलालजी कांकरिया , दृश्य ने विचार ,महिला- मंडल ने
संगीत प्रस्तुत किया। तेममं एवं ज्ञानशाला के बच्चों ने आचार्य महाप्रज्ञ के अवदानों पर सुंदर प्रस्तुति पेश की । तेयुप शपथ ग्रहण का कार्यक्रम भी रखा गया । तेयुप ने लक्ष्य ऊंचा रहे हमारा गीत का संगान किया। कर्मठ कार्यकर्ता कैलाश जी चौपडा़ ने मन मनोनीत अध्यक्ष सतीष जी भंसाली को शपथ ग्रहण कराई। और तेयुप अध्यक्ष सतीष जी ने अपनी टीम की नामों की घोषणा करते हुए शपथ दिलाई।
साध्वीश्री मलयविभा जी ने युवाओं को संबोधित करते हुए करणीय कार्यों के प्रति जानकारी देते हुए जोश होश के जागृत किया।मंच का कुशल संचालन साध्वीश्री विपुलयशा जी ने किया। यह जानकारी संगीता सूर्या ने दी।
विश्व की महान विभूति धर्म चक्रवर्ती आचार्य श्री महाप्रज्ञ

