मुंबई। आचार्य महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि जिनेश कुमार जी के सहवर्ती संत मुनि परमानंद जी के साथ तेरापंथ भवन पधारने पर स्थानीय जैन समाज द्वारा दूर तक अगवानी कर भाव भीना स्वागत किया। मुनिद्वय रैली के साथ सभा भवन पधारे और रैली सभा में परिवर्तित हुई। मुनि जिनेश कुमार जी के सानिध्य में व तेरापंथ सभा के तत्वावधान में उपासक जी गौतम जी वेद मुथा के निर्देशन में त्रिदिवसीय आंशिक संस्कार निर्माण शिविर का सुभारम्भ हुआ।
प्रथम दिन लगभग 60 शिविरार्थी थे। इस अवसर पर मुनि जिनेश कुमार जी ने कहा सतसंगत से सुप्त चेतना जग जाती है। स्वाति जल बून्द सीपी में मोती बन जाता है। सतसंगत से भाग्य बदलता है। मुनि ने आगे कहा सतसंगत से व्यक्ति सुसंस्कारों को प्राप्त होता है। संस्कारो के बीजारोपण का समय बचपन है । बचपन मे जो संस्कार आते है वे पचपन में नही आते है। आज के विषाक्त वातावरण में शिविरों की उपयोगिता स्वतः सिद्ध होती है। मुनि परमानंद जी ने कहा सतसंगत से सुख मिलता है।सतसंगत की साधना से व्यक्ति संस्कारी बनता है उपासक गौतम जी वेदमुथा,सभा अध्यक्ष तेजराज हिरण, तेयुप अध्यक्ष विजय धाकड़ ने विचार रखे। तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। संचालन अजयराज फुलफगर ने किया। गौतम जी वेदमुथा, लक्ष्मी मेहता,हेमा जैन,पायल जैन,साधना फुलफगर ने प्रशिक्षण दिया। ॐ अर्हम प्रतियोगिता में ध्रुव मांडोत ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में राकेश चोरड़िया, तेयुप उपाध्यक्ष हेमंत धाकड़, मंत्री राजेश सोलंकी, कोषाध्यक्ष विनोद कोठारी, विनोद बाफना,लक्ष्मी लाल डांगी आदि का योगदान रहा। जानकारी हेमंत धाकड़ ने प्रेषित की।
त्रिदिवसीय संस्कार निर्माण शिविर का शुभारम्भ

