विकास धाकड़/विलेपार्ले (मुंबई)। पर्युषण महापर्व का मंगल आगाज-आत्मआराधना, खाद्य संयम एवं आध्यात्मिक जागरण का दिया संदेश जैन धर्म के आत्मशुद्धि एवं आध्यात्मिक साधना के महापर्व पर्युषण का मंगलवार 8/9/26 को अंधेरी स्थित सिम्फनी हॉल में श्रद्धा, उल्लास एवं आध्यात्मिक चेतना के साथ मंगल आगाज हुआ।
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री राकेश कुमारी जी आदि ठाणा ४ के सान्निध्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सांताक्रूज़, विलेपार्ले, अंधेरी, बांद्रा एवं खार क्षेत्रों से विशाल जनमेंदनी उपस्थित रही। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी श्री जी के मंगल नवकार मंत्रोच्चार से हुआ। तत्पश्चात सांताक्रूज़ महिला मंडल की बहनों ने मंगलाचरण के भावपूर्ण गीतिका की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके पश्चात विलेपार्ले महिला मंडल की बहनों द्वारा “पर्युषण स्पेशल ट्रेन” के माध्यम से अत्यंत रोचक एवं संदेशपरक प्रस्तुति दी गई।
साध्वी श्री चेतस्वी प्रभा जी ने खाद्य संयम विषय पर जानकारी प्रदान करते हुए आहार में संयम एवं विवेक की आवश्यकता को रेखांकित किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी श्री मलय विभाजी द्वारा किया गया। साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने उपस्थित जनमेदनी को संबोधित करते हुए कहा कि “आज जैनियों के महापर्व पर्युषण का प्रथम दिवस है। यह भीतर की बंद खिड़कियों को खोलने का समय है। इन आठ दिनों में अप्रमत्त बनकर जीवन के अनमोल क्षणों को आत्म आराधना से जोड़ना है। खाद्य संयम की चर्चा करते हुए साध्वी श्री जी ने कहा कि वर्तमान परिवेश में आहार के प्रति नॉलेज के साथ विवेक होना अत्यंत आवश्यक है। क्या, कितना और कैसा आहार करना है—इसका विवेक जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। असंयमित एवं कुपोषित आहार का शरीर के विभिन्न अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से किडनी, गुर्दे, लीवर, फेफड़ों, आमाशय, रक्त, उच्च रक्तचाप सहित मन एवं मस्तिष्क पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझाया।
साध्वी श्री जी ने कहा कि शांति, समता, संतोष एवं संयमित आहार व्यक्ति के जीवन को प्राणवान बनाते हैं तथा दीर्घजीविता की ओर ले जाते हैं। संयमित आहार से मन, वचन एवं काया की त्रिगुप्ति में सहायता मिलती है और भावों की पवित्रता बनी रहती है। उन्होंने पर्युषण के इन दिनों में आहार संयम को आत्मसाधना का महत्वपूर्ण अंग बनाने की प्रेरणा दी। तत्पश्चात आठ दिवसीय पर्युषण आराधना के प्रायोजक श्री रोशनलाल जी कोठारी,शांतिलाल जी कोठारी एवं राजेंद्र जी कोठारी का सम्मान विले पारले तेरापंथ युवक परिषद द्वारा किया गया। वहीं संतोष देवी कोठारी, मंजू देवी कोठारी एवं मीरा देवी कोठारी का सम्मान विले पारले तेरापंथ महिला मंडल द्वारा किया गया। इस अवसर पर अनिल जी बाफना ने अपनी भावनाओं की अभिव्यक्ति देते हुए पर्युषण पर्व के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भावनाएं व्यक्त कीं। वहीं राजेंद्र जी कोठारी एवं शांतिलाल जी कोठारी ने भी अपने भाव व्यक्त करते हुए गुरुदेव की कृपा एवं आशीर्वाद को अपने जीवन का सौभाग्य बताया तथा उपस्थित सभी श्रावक-श्राविकाओं से पर्युषण पर्व की आराधना का अधिकाधिक लाभ लेने का निवेदन किया। कार्यक्रम की संपन्नता से पूर्व साध्वी श्री मलयविभा जी ने पर्युषण प्रवचन से संबंधित अत्यंत रोचक प्रश्नोत्तर करवाए। प्रश्नोत्तर की इस अनूठी प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया और उपस्थित जनमेदनी को यह प्रेरणा मिली कि प्रवचन केवल सुनना ही नहीं, बल्कि उसे एकाग्रता एवं सजगता से आत्मसात करना भी आवश्यक है।
पर्युषण महापर्व के प्रथम दिवस सिम्फनी हॉल में उमड़ी विशाल जनवेदनी ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया। सांताक्रूज़, अंधेरी, विलेपार्ले, बांद्रा एवं खार से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं की उपस्थिति रही। श्रद्धा, साधना, संयम एवं आत्मजागरण से ओतप्रोत यह प्रथम दिवस सभी के लिए पर्युषण की आठ दिवसीय आत्मयात्रा का मंगल एवं प्रेरणादायी प्रारंभ बना। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी श्री मलयविभा जी ने किया। आठ दिवसीय पर्युषण महापर्व की समस्त व्यवस्था विलेपार्ले द्वारा की गई है, जिसके प्रायोजक श्री रोशनलाल जी कोठारी हैं। वहीं पर्युषण के दूसरे दिवस संवत्सरी—क्षमा याचना दिवस की सेवा श्री मदनलाल जी दुग्गड़ की ओर से की गई है। इसी अवसर पर अखंड नवकार महामंत्र जाप का भी शुभारंभ हुआ, जो पर्युषण पर्व के दौरान आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक ऊर्जावान एवं भक्तिमय बनाएगा।
विलेपार्ले में पर्युषण महापर्व के प्रथम दिवस खाद्य संयम् दिवस पर आध्यात्मिक जागरण का श्रावक समाज कों दिया संदेश

