पर्वत पटिया। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा पर्वत पाटीया में शासन श्री साध्वी श्री मधुबाला जी आदि ठाणा 5 के सान्निध्य में पर्युषण महापर्व का प्रथम दिन ‘खाद्य संयम दिवस’ के रूप में मनाया गया। इस विशेष अवसर पर शासन श्री साध्वी मधुबाला जी ने खाद्य संयम के महत्व और उसकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

साध्वी श्री सौभाग्य श्री जी ने कविता पाठ के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा भाई बहनों को खाने में संयम रखने की बात कही। साध्वी श्री मंजुलयशा जी ने अपने वक्तव्य में कहा जीवन शैली में जुड़ाव हमारे दैनिक जीवन में खाद्य संयम की अत्यधिक महत्ता है और इसे हमें अपनी नियमित जीवन शैली का हिस्सा बनाना चाहिए।
• व्यक्तिगत संयम: द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव (परिस्थितियों) को देखते हुए खाद्य संयम हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है।
• संयम की परिभाषा: केवल उपवास, बेला या तेला करना ही तपस्या नहीं है, बल्कि यह जानना कि कब, कितना और क्या खाना है—यहाँ तक कि भूख से कम खाना भी खाद्य संयम की श्रेणी में आता है | तेरापंथी सभा के सदस्यों द्वारा गितीका का संज्ञान किया|
इस आध्यात्मिक आयोजन में समाज के भाई-बहनों की उपस्थिति बेहद सराहनीय और उत्साहजनक रही।

