सोने की जगह प्लेटिनम के गहने खरीदने का चलन बढ़ रहा है. इसके अलाव लोग प्लेटिनम में निवेश भी कर रहे हैं. इसमें युवा सबसे आगे हैं. प्रमुख दक्षिण अफ्रीकी प्लेटिनम उत्पादकों द्वारा समर्थित व्यापार संगठन प्लेटिनम गिल्ड इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत विश्व स्तर पर प्लेटिनम के गहनों की बिक्री का का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि युवा उपभोक्ताओं के बीच प्लेटिनम को लेकर खासा क्रेज है.
ज्यादातर आभूषण विक्रेता ग्राहकों के मूड को भांपते हुये अब प्लेटिनम के आभूषण पर ही ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. आभूषण के कई बड़े विक्रेता अब परंपरागत सोना-चांदी के जेवरों के मुकाबले प्लेटिनम और हीरा जडि़त आभूषणों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं. सोने की तुलना में यह कहीं अधिक दुर्लभ धातु है. सर्राफा बाजार के जानकारों का मानना है कि इस की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में सोने की तरह प्लैटिनम की मांग पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है, इस की मांग दिनोदिन बढ़ती ही जा रही है. वैसे, अब तो त्योहारों में हीरे के बजाय प्लैटिनम की बिक्री अधिक बढ़ रही है . खासकर 15 से 30 वर्ष के युवाओं के बीच प्लैटिनम ने अपनी जगह बना ली है. युवाओं के बीच प्लैटिनम रिंग, लव बैंड व कपल बैंड की मांग अधिक रही. लगभग एक दशक पहले तक प्लैटिनम की मांग पश्चिम भारत में थी लेकिन हाल के वर्षों में पूरे भारत में इस की मांग में इजाफा हुआ है.
भारत में प्लैटिनम की खपत लगातार बढ़ रही है. औटोमोटिव, जेवर और फार्मा क्षेत्र में इस का उपयोग बढ़ने से खपत बढ़ रही है. मौजूदा समय में भारत में इस का बाजार लगभग 12 टन से अधिक है. 2003 में इस की खपत देश में महज 6 टन थी. 2006-07 तक इस की खपत बढ़ते हुए 9 टन हो गई. 2008-09 तक यह 10 टन और 2010 तक इस ने 12 टन के आंकड़े को छू लिया. अब इस की खपत 20 टन तक पहुंच गई है. पहले प्लैटिनम केवल रईसों के लिए हुआ करता था लेकिन आज बहुत सारी ऐसी कंपनियां बाजार में हैं जो हलके प्लैटिनम की ज्वैलरी ले कर बाजार में उतरी हैं. इसी कारण इस की मांग बढ़ रही है. सोने की तुलना में प्लैटिनम का घनत्व अधिक होता है इसीलिए इस का अगर कोई जेवर बनाना हो तो सोने की तुलना में प्लैटिनम अधिक लगता है. इसलिए सोने के जेवर की अपेक्षा इस की कीमत अधिक हो जाती है. हीरे में जिस तरह से सोने का इस्तेमाल होता है, उस की शुद्धता 18 कैरेट होती है यानी इस में 75 फीसदी सोना होता है. लेकिन प्लैटिनम तैयार होता है 14 कैरेट सोने से. बहरहाल, सोने की तरह प्लैटिनम पर भी नक्काशी संभव है. सोने की तुलना में वजन अधिक होने के बावजूद 14 कैरेट सोने की तुलना में प्लैटिनम कुछ नरम धातु है. इसी कारण इस में खरोंच या गलने की भी आशंका होती है. वहीं लगातार इस्तेमाल से सोने के जेवर घिस जाते हैं और उन का वजन कम हो जाता है. जबकि प्लैटिनम के जेवर के साथ ऐसा नहीं होता. प्लैटिनम का रंग सफेद होता है इसलिए इसे सफेद सोना भी कहा जाता है. यहां जानना जरूरी है कि बहुत कुछ एक जैसा होने के बावजूद सफेद सोना यानी व्हाइट गोल्ड प्लैटिनम नहीं होता. यह कम ही लोग जानते हैं कि 14 कैरेट सोना यानी 58.5 प्रतिशत की शुद्धता वाले सोने में खाद मिला कर और उस के ऊपर रोडियम की प्लेटिंग कर के व्हाइट गोल्ड तैयार किया जाता है. इसी कारण बहुत ज्यादा इस्तेमाल होने पर इस की सफेदी पीले रंग में बदल जाने की आशंका रहती है. ऐसा प्लैटिनम के साथ नहीं होता. इसलिए प्लैटिनम के जेवर जब कभी खरीदें तो इस की विशुद्धता का सर्टिफिकेट जरूर लें. भारत के अलावा चीन भी एक ऐसा देश है जहां जेवरों के लिए महंगी धातु की पूछ है. सोने की खरीदारी में ये दोनों देश पहले ही दुनिया में अव्वल रहे हैं, अब प्लैटिनम के जेवरों की खरीदारी में भी भारत और चीन ने रिकौर्ड बनाया है. हाल ही में कीमती धातु के कारोबार के लिए विश्वभर में पहचानी जाने वाली कंपनी जौनसन मैथे की ओर से कराए गए सर्वे के नतीजे से पता चला है कि पूरी दुनिया में प्लैटिनम के जेवरों की बिक्री मुख्य तौर पर चीन पर निर्भर है. उस के बाद भारत का स्थान आता है.
2006 तक सोने की खपत जहां 800 टन हुआ करती थी, वहीं प्लैटिनम की बिक्री महज 2-3 टन थी. जानकार बताते हैं कि आने वाले समय में इस की मांग में 30-40 फीसदी का उछाल देखने को मिलेगा. गौरतलब है कि प्लैटिनम का इस्तेमाल न केवल जेवरों में होता है, बल्कि आटोमोबाइल (59 फीसदी) के साथ कुछ औद्योगिक (20 फीसदी) क्षेत्र में भी इस का उपयोग होता है. इस के कई गुण हैं. यह जंगरोधी होने के साथसाथ घर्षणरोधी भी है| कुल मिला कर सोने, चांदी और हीरे की ज्वैलरी के बीच प्लैटिनम ज्वैलरी ने भी अपने लिए जगह बना ली है. इन दिनों जेवर पहनने के शौकीन महिला और पुरुष, पीली धातु के बाद अब सफेद धातु यानी प्लैटिनम का भी रुख कर रहे हैं. वहीं टीनएज के बीच भी प्लैटिनम का क्रेज है. वैसे तो सफेद धातु में तो चांदी भी आती है लेकिन महिलाओं का झुकाव चांदी के बजाय प्लैटिनम पर अधिक है. प्लैटिनम आज ज्वैलरी का एक नया बाजार बन गया है. यही कारण है कि इस व्हाइट गोल्ड के जेवर का कारोबार करने वाली बहुत सारी कंपनियां बाजार में धाक जमा रही हैं. प्लैटिनम की कीमत में कुल मिला कर उपभोक्ता खासतौर पर शहरी उपभोक्ता 15-20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी को बरदाश्त कर सकते हैं. सोना और प्लैटिनम की मांग में पहले 19 फीसदी का अंतर है. सब से ज्यादा मांग अंगूठी और कपल बैंड की रही है. वर्ष 2013 से प्लैटिनम ज्वैलरी के चैन स्टोर्स, औनलाइन शौपिंग समेत परंपरागत ज्वैलरी स्टोर्स में इस की बिक्री में लगभग 40 फीसदी की वृद्धि हुई है. उम्मीद है कि यह वृद्धि जारी रहेगी.

