नई दिल्ली:लोकसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के लिए कई मोर्चों पर चुनौती पैदा कर दी है। राहुल गांधी के अध्यक्ष पद से इस्तीफे पर अड़े रहने के साथ ही लोकसभा में पार्टी के नेता को लेकर भी संशय बरकरार है। इस पद की जिम्मेदारी किसे दी जाए, इसे लेकर अगले कुछ दिनों में पार्टी को मंथन करना पड़ेगा। हालांकि, मंगलवार को इस तरह के कयास भी लगाए गए कि राहुल गांधी यह जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं, लेकिन किसी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 52 सीटें जीती हैं। इसलिए यह साफ है कि इस बार भी पार्टी को लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता का पद नहीं मिल पाएगा। क्योंकि, इसके लिए कम से कम 54 सीटों की जरूरत होती है। इसके बावजूद पार्टी को लोकसभा में अपना एक नेता चुनना होता है, जिनके नेतृत्व में पार्टी सदन के भीतर की रणनीति पर काम करती है। पिछली बार यह जिम्मेदारी मल्लिकार्जुन खड़गे को दी गई थी, लेकिन इस दफा वह चुनाव हार गए हैं।
कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सदन में नेता पद के लिए राहुल गांधी के अलावा जिन और दो नामों को गंभीरता से लिया जा सकता है, उनमें केरल से सांसद शशि थरूर और पंजाब से चुनकर आए मनीष तिवारी शामिल हैं। पार्टी ने इस बार केरल, पंजाब और तमिनलनाडु में सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं।
शशि थरूर तिरुवनंतपुरम से लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं। जबकि मनीष तिवारी पंजाब से दूसरी बार सांसद बने हैं। थरूर पूर्व यूपीए सरकार में मानव संसाधन और विदेश राज्यमंत्री रह चुके हैं। जबकि मनीष तिवारी सूचना प्रसारण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। दोनों कांग्रेस के प्रवक्ता भी रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि राहुल गांधी खुद यह जिम्मेदारी लेते हैं तो ठीक, नहीं तो थरूर या फिर तिवारी में से किसी एक का चयन इस पद के लिए किया जा सकता है। थरूर यह कह चुके हैं कि पार्टी अगर उन्हें सदन के नेता की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला करती है तो वह तैयार हैं।

