पंकज श्रीवास्तव/पटना। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव फिलहाल जेल में हैं। उनकी अनुपस्थित में राजद पहली बार किसी बड़े चुनाव का सामना कर रहा है। कट्टर समर्थकों से लेकर कट्टर विरोधी तक इस सत्य से इंकार नहीं कर सकते कि लालू प्रसाद यादव बाहर होते तो राजद का बेहतर प्रर्दशन होता। इधर उनके परिवार का घरेलू कलह भी सतह पर है। टिकट बटवारे से लेकर महागठबंधन के घटक दलों को चुनाव प्रचार में उनके आशानुकूल सहयोग न देना, उनके प्रत्याशियों के विरुध अपने डमी प्रत्याशियों को उतार देने जैसे भी गम्भीर आरोप राजद के कार्यकारी सुप्रीमो तेजस्वी यादव पर लगे हैं।
लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थित में पार्टी से लेकर घरेलू मामलों को निपटने की अब पूरी जिम्मेदारी उनके छोटे पुत्र तेजस्वी यादव पर है। तेजस्वी यादव की सबसे बड़ी सिरदर्दी उनके बड़े भाई तेजप्रताप यादव हैं। राजद के एक धड्डे की माने तो तेजप्रताप यादव की योग्यता को न तो पार्टी ने समझा न ही उनके परिवार वालों ने। आज भी इस सत्य को स्वीकार करने वालों की पार्टी के अंदर या बाहर कमी नहीं की तेजप्रताप यादव के अंदर लालू प्रसाद वाली देशज शैली है। जो ठीक अपने बाप जैसे आम अवाम को पार्टी से जोड़ने की मादा रखती है। इसके साथ ही उनके पास युवा समर्थकों की बड़ी जमात है जो उनके एक इशारे पर कुछ भी करने को तैयार बैठे रहते हैं। पड़ताल करें तो ये अपने समर्थकों के लिए किसी भी हद तक जाने की मादा रखते हैं। चौकाने वाला सत्य है राजद जहाँ खुलकर सवर्ण विरोध की बात करता है।वही तेजप्रताप सभी को साथ लेकर चलने की बात करते हैं। लालू और राजद से अपनत्व रखने वालों की माने तो तेजप्रताप यादव की सबसे बड़ी समस्या है वो परिस्थितियों के साथ तालमेल नहीं करते बल्कि परिस्थितियों को ही अपने से तालमेल करने को बाध्य करते हैं। अब चुनावी वक्त में उनकी एक छोटी सी गलती पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है। इसके लिए परिवार ने उन्हें नियंत्रण में रखने के कई उपाय कर रखे हैं। मसलन उनके इच्छा अनुकूल उनकी बड़ी बहन मीसा भारती को भाई विरेन्दर की जगह दानापुर से टिकट दिया। वही उनके कट्टर समर्थकों और सहयोगियों को चुनाव में बड़े दायित्व दिये हैं।
क्या सचमुच तेजप्रताप यादव को पार्टी और परिवार ने वो जगह नहीं दिया जिसके वो हकदार थे?

