अहमदाबाद-शाही बाग। साध्वी श्री अणिमा श्री के सान्निध्य में तेरापंथ सेवा समाज एवं प्रेक्षावाहिनी के तत्त्वावधान में तेरापंथ भवन के रमणीय परिसर में त्रिदिवसीय आवासीय प्रेक्षाध्यान शिविर का आयोजन किया गया। वरिष्ठ प्रेक्षा-प्रशिक्षक श्री पारसमलजी दुगड एवं श्रीमती विमलाजी दुगड़ ने शिविराधियों को प्रशिक्षण दिया । लगभग एक सौ पैंतीस भाई-बहनों ने शिविर में भाग लिया।
साध्वी श्री अणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा. आज तनाव के कारण व्यक्ति की कार्यक्षमता घटती जा रही है। ऊर्जा का क्षरण हो रहा है।
शक्ति के क्षरण को रोकने की सशक्त प्रक्रिया का नाम है- प्रेक्षाध्यान । मानसिक एकाग्रता को बढ़ाने वाले टोनिक का नाम है- प्रेक्षाध्यान | आधि -व्याधि उपाधि को दूर करने वाली संजीवनी का नाम है- प्रेक्षाध्यान।
चित्त की भावधारा जब एक दिशा में केन्द्रित होती हैतब सृजनात्मक शक्ति का विकास होता है। यद्यपि आज ध्यान की अनेक पद्धतियां प्रचलित है किन्तु प्रेक्षाध्यान एक सर्वांगीण ध्यान पद्धति है। इस प्रयोगात्मक ध्यान पद्धति के द्वारा अनेक लोगों ने अपने जीवन में बदलाव घटित किया है। सभी शिविरार्थी एवं पूरी परिषद इस त्रिदिवसीय शिविर से शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य का वरण करें एवं समाधि की दिशा में प्रस्थित हो
साध्वी श्री ने कहा- हमें जानकारी मिली कि नया भवन बनने के बाद पहली बार आवासीय शिविर लगा है। तेरापंथ सेवा समाज के पदाधिकारियों एवं सदस्यों का उत्साह सराहनीय है। भाई सज्जनराजजी, छोटुलालजी, दिनेशजी, ज्ञानजी, छितरमलजी सहित सभी का श्रम इस शिविर में मुखर हुआ है। वरिष्ठ प्रेक्षा-प्रशिक्षक श्री पारसमलजी दुगड़ एवं उनकी धर्मपत्नी विमलाजी दुगड़ कुशल प्रशिक्षक है।
समझाने की अच्छी शैली है। ज्ञान का अच्छा क्षयोपशम है। इन्होंने प्रेक्षाध्यान के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है। साधी श्री अणिमाश्रीजी ने शिविर के दौरान स्वर-विज्ञान का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।
त्रिदिवसीय आवासीय प्रेक्षाध्यान शिविर का आयोजन
Highlights
- सृजनात्मक शक्ति के विकास का घटक है- प्रेक्षाध्यान

