मुंबई। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का छठवाँ दिन। आज का विषय है- “आत्मविकास का सोपान, अनुशासन।” महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में अणुव्रत सप्ताह के अंतर्गत अनुशासन दिवस मनाया गया।
शासनश्री साध्वीश्री कंचन प्रभाजी ने कहा— अनुशासन शब्द संस्कृति का प्रतीक है। विचारों का संतुलन है। अनुशासन के बल पर शरीर, वाणी, मन व व्यवहार को संयमित किया जा सकता है। जो व्यक्ति अनुशासन की चादर में ढलता है, वह आदर्श जीवन का उदाहरण बन जाता है। तेरापंथ धर्मसंघ अनुशासन का उदाहरण है। संतों का लगाव एक गुरु के अनुशासन में रहते हुए उनके द्वारा निर्धारित नियमों का पालन करना जीवन का आधार है एवं गुरु के प्रति की आस्था।
साध्वीश्री मंजुरेखाजी ने कहा— आज की आपाधापरी जिंदगी में अनुशासन की प्रासंगिकता है। इसके बिना मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा संभव ही नहीं। चारों ओर जो जीवन की मूल्यवत्ता घट रही है, उसमें हर व्यक्ति असहाय है। उसे कहीं भी चैन नहीं। इस भौतिक जीवन शैली में संयम साधना की जरूरत है।
साध्वी उदित प्रभाजी ने विचार व्यक्त किए। साध्वी मंजुरेखाजी, उदितप्रभाजी, निर्भय प्रभाजी, चेलना श्री जी ने सुंदर गीत प्रस्तुत किया। संयोजन साध्वीश्री मंजुरेखाजी ने किया। सभा के अध्यक्ष श्री देवेंद्र डागलिया ने विचार रखे।
अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह: कालबादेवी में अनुशासन दिवस मनाया गया

