विकास धाकड़ /गोरेगांव {मुंबई}। पर्यावरण दिवस के अवसर पर अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी के तत्वावधान में, अणुव्रत समिति मुंबई के निर्देशन में, क्षेत्रिय अणुव्रत समिति गोरेगांव के संयोजक श्री शांतिलालजी बाफना के संयोंजकीय में,पगरव सोसायटी के प्रांगण में वृक्षारोपण का सुंदर आयोजन किया।
इस कार्य की स्थानीय सोसायटी के रहवासियो ने बहुत ही प्रशंसा की एवं कहा कि पेड़ पर्यावरण का एक अनिवार्य हिस्सा है। धरती पर पेड़ों और पौधों के अस्तित्व के बिना मनुष्य और जानवरों की अन्य प्रजातियों का अस्तित्व संभव नहीं है।
वृक्षारोपण के बुनियादी लाभों में से एक यह है कि यह हमें ऑक्सीजन देती हैं। ये कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर पर्यावरण को शुद्ध और स्वच्छ बनाने का कार्य करती हैं। रबर के अलावा फल, लकड़ी, आदि और भी बहुत कुछ प्रदान करते हैं। लोगों को अपने लाभों को बल देते हुए अधिक पेड़ों के रोपण के महत्व के बारे में संवेदनशील होना चाहिए। इसका प्रसार रेडियो, टेलीविजन, समाचार पत्र, सोशल मीडिया, होर्डिंग और पत्रक के माध्यम से किया जा सकता है। वृक्षारोपण पहाड़ी इलाकों में वे मिट्टी को पकड़ उसे खिसकने से भी रोकते हैं। पेड़ों को उनके चिकित्सा गुणों के लिए भी जाना जाता है। पेड़ फाइबर, रेसिन, रबड़, टैनीन, शहद और बहुत सी चीजें प्रदान करते हैं। क्षेत्रीय संयोजक श्री शांतिलाल बाफना नें सभी का स्वागत किया एवं अणुव्रत गीत का संगान किया,उपासक महोदय श्री रमेश सिंघवी नें कहाँ की पर्यावरण हमारे चारों ओर का वह प्राकृतिक और कृत्रिम आवरण है जो हमें हवा, पानी, मिट्टी और सभी जीव-जंतुओं से जोड़ता है।
पर्यावरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है:परि'(चारों-तरफ) और ‘आवरण’ (घेरा) यह हमें जीने के लिए शुद्ध हवा, साफ पानी और भोजन प्रदान करता है। पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए पर्यावरण का संतुलन आवश्यक है,पर्यावरण संरक्षण के उपाय- अधिक से अधिक पेड़ लगाएं। पानी और बिजली की बचत करें।
प्लास्टिक का उपयोग कम करें। एवं कहाँ की अणुव्रत आंदोलन एक महान सामाजिक-आध्यात्मिक और नैतिक आंदोलन है जिसकी शुरुआत 1 मार्च 1949 को राजस्थान के सरदार शहर कस्बे में जैन तेरापंथ धर्म संघ के नौवें आचार्य, आचार्य श्री तुलसी द्वारा 1 मार्च 1949 कों सरदार शहर, राजस्थान में की
मूल मंत्र: “संयमः खलु जीवनम्” संयम ही जीवन है,स्वरूप: यह किसी एक संप्रदाय या धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि एक असाम्प्रदायिक और सार्वभौमिक जीवनशैली है। इसका उद्देश्य चरित्र निर्माण: स्व-अनुशासन, नैतिकता, प्रामाणिकता और सदाचार को बढ़ावा देना। जीवन में हम छोटे-छोटे नैतिक संकल्प लेकर उनका पालन करें,जिससे व्यक्ति खुद में सुधार कर सके। जिससे नशाखोरी, हिंसा, भ्रष्टाचार, दहेज प्रथा और सामाजिक कुरीतियों का विरोध कर सकें और विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच आपसी सदभावना और शांति स्थापित कर सकें। इसको सफल बनाने में अणुव्रत परिवार मुंबई सें श्री राकेश बोहरा सभा सें श्री कमलेश चंडालिया, श्री दिलीप बाफना,श्री शांतिलालजी कोठारी,तेयुप सें अध्यक्ष श्री मनीष सिंघवी मंत्री श्री नीलेश सांखला,श्री भरत बोहरा एवं कन्या मंडल सें रैनी सिसोदिया आदि की सहभागिता रही। कार्यक्रम का सुंदर संयोजन एवं आभार ज्ञापन ABTYP JTN सें श्री विकास धाकड़ नें किया।

