चेन्नई। युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण के विद्वान सुशिष्य डॉ मुनिश्री पुलकित कुमारजी ठाणा 2 के के मंगल सानिध्य ट्रिप्लीकेन तेरापंथ भवन में पर्युषण महापर्व के सातवें दिन ध्यान दिवस के रूप में आयोजित हुआ। मुनिश्री पुलकित कुमारजी ने कहा- ध्यान जीवन का प्राण है। ध्यान से व्यक्ति अनेक लब्धियों को प्राप्त करता है। अशुभ विचारों और कर्मों को क्षय करने में ध्यान की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुनिश्री ने आगे कहा प्रेक्षाध्यान के द्वारा मन को साधा जाता है। ध्यान की साधना से सिद्धि प्राप्त होती है।
प्रेक्षाध्यान के संदर्भ में मुनि श्री ने कहा जैन ध्यान पद्धति का परिष्कृत रूप है प्रेक्षाध्यान। श्रमण भगवान महावीर स्वामी ने ध्यान से आत्म साक्षात्कार किया था। आचार्य महाप्रज्ञ ने स्वानुभूत प्रयोगों का विश्लेषण प्रेक्षाध्यान के अंतर्गत किया। आचार्य महाप्रज्ञ की 125 से ज्यादा पुस्तकें प्रेक्षाध्यान साहित्य के नाम से विख्यात है। मुनिश्री ने प्रेरणा देते हुए कहा जीवन में प्रेक्षा ध्यान साहित्य से परिवर्तन आ सकता है सभी को प्रेक्षाध्यान के अंतर्गत कायोत्सर्ग करने की मुनिश्री ने प्रेरणा दी। नचिकेता मुनि आदित्य कुमार ने ध्यान का प्रयोग करवाते हुए प्रेक्षा ध्यान विषय पर विवेचन किया।आज मुनि वर के सानिध्य में 37 अठाई तपस्या का प्रत्याख्याण लिया। ट्रिप्लीकेन तेरापंथ ट्रस्ट के अध्यक्ष संतोष धारीवाल एवं अशोक लुंकड़ एवं अन्य पदाधिकारी ने सभी तपस्वियों का सम्मान किया मंच का संचालन मंजू गेलड़ा ने किया।।
चेन्नईः पर्युषण महापर्व का सातवां दिन ध्यान दिवस के रूप में मनाया गया
Highlights
- ध्यान जीवन का प्राण हैः मुनि पुलकित कुमार

