मुंबई। कांदिवली स्थित तेरापंथ भवन में शासनश्री साध्वीश्री विद्यावतीजी (द्वितीय) के मंगलमय सान्निध्य में चातुर्मासिक मंगल प्रवेश के पश्चात आयोजित ‘सभा प्रशिक्षण कार्यशाला’ उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों एवं श्रावक-श्राविकाओं ने साध्वीवृंद से मंगलपाठ का श्रवण कर कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यशाला के प्रथम सत्र में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महेन्द्रकुमार नाहटा ने श्रावक निष्ठा-पत्र के वाचन के पश्चात अपने उद्बोधन में आचार्यश्री कालूगणी के शासनकाल में महासभा की स्थापना की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए सभा प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्देश्य एवं संघीय रीति-नीति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से संगठनात्मक कार्यप्रणाली अधिक सुदृढ़ होगी तथा धर्मसंघ की प्रभावना को नई दिशा एवं गति मिलेगी।
मुंबई सभा के अध्यक्ष श्री सुरेन्द्र कोठारी ने अपने स्वागत उद्बोधन में महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री महेन्द्रकुमार नाहटा, महासभा के महामंत्री श्री विनोद बैद, महासभा के उपाध्यक्ष श्री प्रकाश डाकलिया, श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री मेघराज धाकड़, श्री किशन डागलिया सहित सभी अतिथियों, पदाधिकारियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से पधारे सभा प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएं संगठनात्मक दक्षता, अनुशासन एवं समन्वय को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होती हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त मार्गदर्शन के आधार पर मुंबई सभा की पूरी टीम महासभा के निर्देशों के अनुरूप कार्य करते हुए धर्मसंघ की प्रभावना के कार्यों को नई गति प्रदान करेगी। श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री मेघराज धाकड़ ने सभी पदाधिकारियों का आत्मीय स्वागत करते हुए ज्ञानशाला को अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
महासभा के महामंत्री श्री विनोद बैद ने अपने प्रेरक वक्तव्य में कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ आज विश्वभर में जो विशिष्ट पहचान बनाए हुए है, वह आचार्य परम्परा के अथक परिश्रम एंव अनुशासन का परिणाम है। उन्होंने ‘सभा संचालन मार्गदर्शिका’ की विस्तृत जानकारी देते हुए उसके व्यावहारिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मुंबई सभा के निवर्तमान अध्यक्ष श्री माणक धींग की संघीय निष्ठा की विशेष सराहना करते हुए बताया कि उन्होंने मुंबई सभा के नवीन कार्यालय एवं चित्त समाधि केंद्र के उद्घाटन के कारण मुंबई सभा के चुनाव दो माह बाद कराने का निवेदन किया था, किंतु महासभा के निर्णय का सम्मान करते हुए निर्धारित समय पर चुनाव संपन्न कराने का निर्णय सहज भाव से स्वीकार किया। इसे उन्होंने संघीय अनुशासन एवं समर्पण का अनुकरणीय उदाहरण बताया।
कार्यशाला को आगे बढ़ाते हुए महासभा के उपाध्यक्ष एवं सुमधुर गायक श्री प्रकाश डाकलिया ने दायित्व ग्रहण करने के पश्चात पदाधिकारियों की भूमिका, कार्यशैली तथा तेरापंथ भवन के प्रभावी प्रबंधन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन प्रदान किया।
इसके पश्चात श्री किशन डागलिया ने महासभा के प्रमुख आयाम-सेवा साधक श्रेणी, सघन साधना शिविर एवं ज्ञानशाला प्रकल्प की विस्तृत जानकारी दी। वहीं श्रीमती कुमुद कच्छारा ने ‘बेटी तेरापंथ की’ योजना के उद्देश्य एवं उसकी उपयोगिता से अवगत कराया।
मुंबई सभा के मंत्री श्री गौतम डांगी ने बताया कि कार्यशाला की व्यापकता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इसमें मुंबई अंचल, पश्चिम महाराष्ट्र तथा मेवाड़ संभाग की 50 से अधिक सभाओं का प्रतिनिधित्व रहा, जिसमें 240 से अधिक पदाधिकारीगण उपस्थित थे। कार्यक्रम के उत्तरार्ध में महासभा के महामंत्री श्री विनोद बैद ने उपस्थित पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए संगठनात्मक विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन मुंबई सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री दिनेश सुतरिया ने किया तथा अंत में मुंबई सभा के कोषाध्यक्ष श्री रिंकू बापना ने अतिथियों एवं उपस्थित सभी पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। यह जानकारी मीडिया संयोजक अजय डांगी ने दी।

