बेंगलूरु। जैन आचार्यों ने भक्तामर स्तोत्र के अनेक कल्प, विधान और अनुष्ठान तैयार किए हैं। इस कलयुग में भक्तामर का भक्ति पूर्वक पाठ कई समस्याओं के समाधान में मददगार साबित हुआ है। इसका यंत्र, तंत्र और मंत्र का प्रभाव भी अनुभव किया जा सकता है।
यह बातें मुनि डॉ. पुलकित कुमार ने तेरापंथ भवन, गांधीनगर में आयोजित भक्तामर-शक्ति का स्रोत विषयक संगोष्ठी में कही। उन्होंने कहा कि भक्तामर स्तोत्र जैन धर्म में सर्वमान्य एवं प्रभावशाली रहा है, जो भावनात्मक भक्ति और मानसिक शक्ति को जागृत करता है। मुनि आदित्य कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए। भक्तामर मंत्र हीलिंग ट्रेनर डॉ. अनीश जैन ने स्वयं के अनुभव साझा करते हुए कहा कि आदिनाथ तीर्थंकर ऋषभदेव की इस स्तुति में विशेष ऊर्जा है, जो मानसिक शांति देती है और अनेक इच्छाओं की पूर्ति में मदद करती है।
भक्तामर गर्भ संस्कार ट्रेनर डॉ. सुमन पाटनी ने बताया कि स्तोत्र के श्लोक गर्भस्थ शिशु पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते है, इसलिए माताओं को गर्भावस्था में नियमित पाठ करना चाहिए। न्यूमेरोलॉजी मास्टर जयविन जैन ने भक्तामर के विभिन्न प्रभावों पर चर्चा की। इस अवसर पर आदिनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर ट्रस्ट, चिकपेट के मंत्री डी. कांतिलाल जैन ने मुनि को चिकपेट मंदिर उपाश्रय में पधारने का भावपूर्ण आमंत्रण दिया। संगोष्ठी में देवेंद्र जैन, कैलाश बाफना, दिलीप भंडारी, मयूर आंचलिया, निरम के सीनियर साइंटिस्ट प्रसन्न चौरडिया और नवरत्न आंचलिया आदि उपस्थित थे। जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, गांधीनगर की ओर से सभी अतिथियों का सम्मान किया गया।
भक्तामर पाठ से जागती है भक्ति और मन की शक्तिः मुनि पुलकित

