राजकुमार गौतम, बस्ती (उत्तर प्रदेश)। में नगरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (यूएचडब्ल्यूसी) को बिना फार्मासिस्ट के संचालित किए जाने पर यूथ फार्मासिस्ट फेडरेशन ने कड़ा ऐतराज जताया है। फेडरेशन के बस्ती जिला महामंत्री आदर्श वर्मा ने कहा कि इन सेंटर्स में फार्मासिस्ट का पद स्वीकृत नहीं किया गया है, जो फार्मेसी एक्ट 1948 का सीधा उल्लंघन है।
उन्होंने सरकार और अधिकारियों के इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए इसके खिलाफ संघर्ष छेड़ने की घोषणा की है। आदर्श वर्मा ने सुरभि सलोनी से बातचीत में विस्तार से बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नगरीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किए गए हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स में कुल पांच पदों को स्वीकृति दी गई है। इनमें मेडिकल ऑफिसर (एमबीबीएस), एएनएम (ऑक्सिलरी नर्स मिडवाइफ), स्टाफ नर्स, सपोर्ट स्टाफ और गार्ड शामिल हैं। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से फार्मासिस्ट का पद इनमें शामिल नहीं है। वर्मा ने कहा, “बिना फार्मासिस्ट के ही ये सेंटर्स चालू कर दिए गए हैं। क्या सरकार की मंशा बिना फार्मासिस्ट के ही हेल्थ सेंटर्स चलाने की है? यह न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि कानूनी रूप से भी गलत है।
“फार्मेसी एक्ट 1948 के प्रावधानों का हवाला देते हुए वर्मा ने जोर देकर कहा कि दवाओं का वितरण, भंडारण और रखरखाव केवल योग्य फार्मासिस्ट द्वारा ही किया जा सकता है। कोई अन्य व्यक्ति या स्टाफ इस कार्य को नहीं कर सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकारी अधिकारी देश के संविधान से ऊपर हैं? “फार्मासिस्ट के पद को समाप्त करना फार्मेसी एक्ट का स्पष्ट उल्लंघन है। नगरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स को बिना फार्मासिस्ट के चलाना और उनके पद को खत्म करना पूरी तरह असंवैधानिक कार्य है,” वर्मा ने कहा। यूथ फार्मासिस्ट फेडरेशन के इस बयान से राज्य भर के फार्मासिस्टों में हलचल मच गई है। फेडरेशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह फैसला न केवल फार्मासिस्टों के रोजगार को प्रभावित कर रहा है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी खतरे में डाल रहा है। बिना योग्य फार्मासिस्ट के दवाओं का प्रबंधन गलत दवा वितरण, एक्सपायरी दवाओं का इस्तेमाल या अन्य स्वास्थ्य जोखिमों को जन्म दे सकता है।
वर्मा ने बताया कि फेडरेशन इस मुद्दे को लेकर उच्च न्यायालय या अन्य संबंधित प्राधिकरणों में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही, राज्य स्तर पर धरना-प्रदर्शन और जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।उत्तर प्रदेश में नगरीय हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स आयुष्मान भारत योजना के तहत शुरू किए गए हैं, जिनका उद्देश्य शहरी इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इन सेंटर्स में सामान्य जांच, दवा वितरण, टीकाकरण और स्वास्थ्य परामर्श जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। लेकिन फार्मासिस्टों की अनुपस्थिति से दवा प्रबंधन की जिम्मेदारी अन्य स्टाफ पर आ जाती है, जो कानूनी रूप से अनुचित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति मरीजों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकती है। सरकार की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। न्यूज एक्सप्रेस ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। फेडरेशन ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से इन सेंटर्स में फार्मासिस्ट के पद सृजित किए जाएं और मौजूदा सेंटर्स में फार्मासिस्टों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। यूथ फार्मासिस्ट फेडरेशन के इस आंदोलन से जुड़ने के लिए फार्मासिस्ट समुदाय को एकजुट होने का आह्वान किया गया है। वर्मा ने कहा, “यह लड़ाई सिर्फ फार्मासिस्टों की नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम की गरिमा और कानून की रक्षा की है। हम सरकार के इस संविधान विरोधी फैसले के खिलाफ अंत तक लड़ेंगे।”
फार्मासिस्टों का पद खत्म करना फार्मेसी एक्ट का उल्लंघन, यूथ फार्मासिस्ट फेडरेशन ने उठाई आवाज

