By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading: अमेरिका की यात्रा से भारत के भविष्य का अनुभव
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
Businessnational

अमेरिका की यात्रा से भारत के भविष्य का अनुभव

Last updated: June 3, 2025 11:19 am
Surabhi Saloni
Share
3 Min Read
SHARE
Highlights
  • टनल के पार की दृष्टि: हॉलैंड टनल से सीखता भारतः भरतकुमार सोलंकी

जब मैं न्यू जर्सी से न्यू यॉर्क की ओर हॉलैंड टनल के रास्ते सफर कर रहा था, तो आंखें तकनीक से अधिक दृष्टिकोण पर टिक गईं। एक ओर का रास्ता इतना चौड़ा कि दो बसें न केवल साथ चल सके, बल्कि 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सके और बीच में एक पूरी लेन केवल इमरजेंसी सेवाओं के लिए आरक्षित — ऐसी सुस्पष्ट योजना जिसे देख लगा कि यह सिर्फ टनल नहीं, एक सोच का नमूना हैं।
और यह तो सिर्फ एक तरफा मार्ग था – लौटते समय एक अलग समानांतर टनल न्यू यॉर्क से न्यू जर्सी की ओर आती हैं।यानी सौ साल पहले, 1927 में उद्घाटित ये दोनों टनल उस समय की यातायात जरूरतों से नहीं, बल्कि भविष्य की ट्रैफिक संस्कृति की कल्पना से बनाई गई थी।
अब एक प्रश्न उठता हैं— क्या आज से डेढ़ सौ साल पहले अमेरिका में किसी ने आज की जनसंख्या, गाड़ियों की गति, आपातकालीन सेवा की तीव्रता और लॉजिस्टिक डिमांड्स की कल्पना की थी?
उत्तर हैं – हां! और इसी का नाम हैं नीति-निर्माण में दूरदर्शिता।
अब इसी को भारत के सन्दर्भ में रखे।भारत में आज भी कई परियोजनाएं शुरू होती हैं, परंतु उनका आधार होता हैं – “अभी की समस्या का समाधान”। जब तक समस्या विकराल न हो जाए, तब तक नीति नहीं बनती। जबकि आवश्यकता हैं ऐसी दृष्टि की, जो अगले 150 वर्षों के भारत को देखे।
मुंबई की अंडरसी टनल निश्चित ही गर्व का विषय हैं। लेकिन क्या हमने इसे 50 साल पहले सोचा होता, तो आज यह नेटवर्क कहीं बड़ा और असरदार होता? क्या हमारे पास अभी वह दृष्टि हैं, जो 2175 के भारत को समझे और उसी के अनुसार 2025 में नींव डाले?
आज अमेरिका में टनल के अलावा भी हाईस्पीड रेल, स्मार्ट लॉजिस्टिक कॉरिडोर, शहरी नियोजन और जल प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं दशकों पहले से बन रही हैं। भारत अगर असल में आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्वकर्ता बनना चाहता है, तो उसे सिर्फ योजना नहीं, “परिकल्पना” करनी होगी।
टनल सिर्फ दो शहरों को जोड़ती नहीं – वह दो युगों को जोड़ती हैं। एक जहां आज की भीड़ हैं और एक जहां भविष्य की संभावना हैं।
भारत को ऐसे टनल्स की ज़रूरत हैं – सोच और निर्माण, दोनों स्तर पर।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article जीतो लेडीज़ विंग द्वारा “पहचान, बिटवीन ड्रीम्स एंड ड्यूटी” सत्र का सफल आयोजन
Next Article ‘सैयारा एल्बम में मेरे पिछले 5 वर्षों में संजोए गए गीत, विचार और धुनें हैं!’ : मोहित सूरी

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

15 हजार वोटों से ममता बनर्जी की हुई हार, शुभेंदु अधिकारी ने दी शिकस्त
national
May 5, 2026
आज से बंगाल भयमुक्त हुआ और विकास के भरोसे से युक्त हुआ : मोदी
national
May 5, 2026
सतिंदर सरताज ने रणवीर सिंह के ‘धुरंधर’ प्रदर्शन को दिया “स्टैंडिंग ओवेशन”: “ऐसी मेहनत को मैं दिल से सराहता हूं”
entertainment
May 4, 2026
विरार में अल्ट्रा एचडी LASIK संग ASG दृष्टि आई हॉस्पिटल में नेत्ररोगियों के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा
Business Mumbai / Maharshtra
May 4, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?