मुंबई: 6 लाख से ज्यादा की आबादी वाले धारावी के लिए कहा जा रहा था कि कोरोना का संक्रमण यहां विकराल रूप धारण कर सकता है, उस धारावी में अब लगातार संक्रमितों की संख्या कम होती जा रही है। यही नहीं पिछले 7 दिनों के दौरान यहां एक भी मौत नहीं हुई है। शहर के सबसे बड़े कोरोना हॉटस्पॉट के रूप में फेमस हो चुके धारावी में फिलहाल 1912 संक्रमित मरीज हैं और यहां 71 लोगों की मौत हुई है। पिछले दो दिन में यहां सिर्फ 23 केस सामने आए हैं। यहां रविवार को 13 और शनिवार को 10 केस सामने आए थे।
बीएमसी की ओर से धारावी में कोरोना के बढ़ते मामलों पर रोक का दावा करते हुए एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर सुरेश ककनी ने कहा, ‘हम लोगों ने धारावी में कोरोना की रोकथाम के लिए कड़ी मेहनत की है और अब उसके अच्छे रिजल्ट आने शुरू हो गए हैं।’ धारावी के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में कल्याणवाड़ी, मुकुंद नगर, सोशल नगर, मुस्लिम नगर और मदीना नगर शामिल हैं।
धारावी को बचाने के लिए ऐक्शन प्लान
धारावी को कोरोना वायरस के प्रकोप से बचाने के लिए बीएमसी ने स्पेशल ऐक्शन प्लान बनाया है। इसमें डॉक्टर, नर्स और मेडिकल डिपार्टमेंट शामिल हैं। ऐसी 10 टीमों में विभिन्न प्राइवेट हॉस्पिटल्स के 24 डॉक्टर भी शामिल हैं, जो डोर टू डोर जाकर धारावी के रहनेवालों की जांच कर रहे हैं। हर टीम में 2 डॉक्टर, एक एएनएम और दो सीएचपीएस शामिल हैं।
फीवर कैंपों की वजह से हुई मदद
धारावी में 29 अप्रैल को सबसे ज्यादा 91 संक्रमित मरीज मिले थे। इससे कम 84 मरीज 7 मई को सामने आए। असिस्टेंट म्युनिसिपल कमिश्नर किरन दिघावकर ने बताया, ‘फीवर कैंपों में लोगों की स्क्रीनिंग की गई। उन्हें आइसोलेट किया गया, जिससे यहां कोरोना मरीजों की संख्या में कमी आई है। समय से इलाज मिल पाने के कारण मृत्युदर घटी है।’
एक कमरे में रहते हैं 8-10 लोग
दुनिया के इस सबसे बड़े स्लम (2.6 स्क्वायर किलोमीटर इलाका) में 6 लाख लोग रहते हैं। यहां दस बाई दस फीट का कमरा 8-10 लोगों का घर होता है। यहां 73 फीसदी लोग पब्लिक टॉयलेट इस्तेमाल करते हैं। किसी टायलेट में 40 सीट होती हैं, कहीं 12 और कहीं 20 सीट वाले टॉयलेट होते हैं। एक सीट को रोज अंदाजन 60 से 70 लोग इस्तेमाल करते हैं, यानी एक दिन में एक हजार से ज्यादा लोग पब्लिक टॉयलेट में आते हैं।

