तिरुपुर (तमिलनाडु )। वर्धमान भगवान महावीर का नाम है। उनके इस नाम का शाब्दिक अर्थ होता है बढ़ता हुआ। इस वर्धमान शब्द की व्याख्या के साथ होता है वर्धमान महोत्सव। वर्धमान होने से हम आत्मा के आसपास रहने लगते हैं, जिससे जीवन के कषायों से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है। हमारा रूझान आत्मा के प्रति होना चाहिए। शरीर नश्वर है लेकिन आत्मा नहीं। इसलिए अपनी आत्मा को पुष्ट बनाएं उसे मोक्ष के पथ पर अग्रसारित करने का निरंतर प्रयास करें। इससे आदमी का कल्याण हो सकता है। शरीर को साफ रखना अलग बात है, किन्तु जब तक आत्मा की सफाई नहीं होगी आदमी के जीवन में विशेष बदलाव नहीं आ सकता। इसलिए प्रत्येक मानव को अपने जीवन में वर्धमानता लाने का प्रयास करना चाहिए।
साधु-साध्वियों के बढ़ते सिंघाड़े को वर्धमान महोत्सव का मुख्य कारण बताया। साथ सभी साधु-साध्वियों को प्रकृति प्रदत्त सभी वस्तुओं को संयम के साथ उपभोग करने का मंत्र देते हुए आचार्य श्री ने कहा कि व्यवस्थाओं का सम्मान रखते हुए पदार्थों के प्रयोग में संयम बरतनी चाहिए। किसी भी पदार्थ का आवश्यकता से अधिक दोहन करने के बजाय उसके अल्प मात्रा से ही अपने कार्य को पूर्ण कर लेने का प्रबन्धन करना चाहिए।
वर्धमान महोत्सव का शाब्दिक अर्थ होता है बढ़ता हुआः आचार्य महाश्रमण

