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Reading: वर्धापना वैराग्य कार्यक्रम में दीक्षार्थी खुश बाबेल का अभिनंदन
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वर्धापना वैराग्य कार्यक्रम में दीक्षार्थी खुश बाबेल का अभिनंदन

Last updated: September 29, 2019 10:44 pm
Surabhi Saloni
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2 Min Read
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ठाणे। साध्वी श्री आणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सानिध्य में वर्धापना वैराग्य की कार्यक्रम के अंतर्गत बंगलोर में आचार्य श्री महाश्रमण के कर-कमलों से दीक्षित होने वाले दीक्षार्थी मुमुक्षु खुश बाबेल का स्वागत तेरापंथी सभा ठाणा एवं समस्त तेरापंथ समाज ठाणा द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में अभा तेयुप महिला मंडल की महामंत्री तरुणा बोहरा, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य निर्मला चंडालिया, भारती सेठिया, कांता डुंगरवाल, मुम्बई सभाध्यक्ष नरेंद्र तातेड़, मलाड सभाध्यक्ष दलपत बाबेल, सिरियारी संस्थान के मंत्री निर्मल श्रीश्रीमाल की गरिमामय उपस्थिति रही।
साध्वी आणिमाश्रीजी ने अपने उद्बोधन में कहा दीक्षा वह सुवास है, जो भीतर-बाहर सबको सुवासित कर देती है। दीक्षा वह दिव्य प्रभात है, जो जन्म-जन्म के अंधकार के आलोक से आपूरित कर देता है। संयम-पथ के राही मुमुक्षु खुश गुरुवार की पुनीत सन्निधि में अंतर्प्रज्ञा जागृति के गुरु प्राप्त करे और जीवन मे सहजता, सरलता का विकास करे। विवेक, विनय व समपर्ण की त्रिवेणी में अभिस्नान होकर गुरुदृष्टि की पल-पल आराधना करें।
साध्वी मंगलप्रज्ञाजी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा आज का उत्सव विराग का उत्सव है। विराग का उत्सव राग के उत्सव से भारी पड़ता है। इस उत्सव का महानायक वह ही बनता है,  जिसके अंदर वैराग्य का अंकुर प्रस्फुटित होता है। भाई खुश के जीवन मे न केवल वैराग्य का अंकुर प्रस्फुटीत हुआ है बल्कि अच्छी फसल भी लहलहा रही है। तेरापंथ धर्मसंघ में दीक्षित हो रहे है। तेरापंथ धर्मसंघ में दीक्षित होने का अर्थ है अपने जीवन को आनंद के उत्सव से जोड़ देना। तुम्हारे दिल-दरिया में आनंद हिलोरे लेता रहे, मंगलकामना।
साध्वी कर्णिकाश्रीजी, साध्वी सुधाप्रभाजी, साध्वी समत्वयशाजी, साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने संयमपथ के राही खुश को लेकर खुशी मनाए गीत का प्रेरक एवं भावपूर्ण संगान किया। नरेंद्र तातेड़, निर्मल श्रीश्रीमाल, तरुणा बोहरा,  जितेंद्र बरलोटा, सिमा सांखला, भारती सेठिया, निर्मला चंडालिया, प्रिया मुथा, सुनीता चोपड़ा, दीपेश मोटावत, रमेश ढीलीवाल, दलपत बाबेल, बसंता बाबेल व दीक्षार्थी खुश बाबेल ने भावपूर्ण उद्गार व्यक्त किए। रमिला बडाला ने कुशल संचालन किया।

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