डोंबिवली। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डोंबिवली कन्या मंडल द्वारा ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला की शुरुआत नमस्कार महामंत्र से हुई। यह कार्यशाला तीन पड़ाव में संपन्न हुई। कार्यशाला का पहला चरण “जैन तत्वविज्ञान में पर्यावरण का क्या महत्व है” इस विषय पर रखा गया। जिसमें उपासिका बहन श्रीमती सुधाजी सियाल ने पर्यावरण का महत्व जैनत्व से जोड़ते हुए बहुत ही सरल शब्दों में बताया। जैसे की- सव्वे पाणा ण हंतव्वा, भगवान महावीर द्वारा दी गई शिक्षा जियो और जीने दो, इत्यादि। उन्होंने हमें यह भी समझाया की हमें आकांक्षा और आवश्यकता के बीच अंतर समझना जरूरी है, जिससे हम प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण कर सके।
कार्यशाला का दूसरा चरण “कम उपयोग, पुन: चक्रण और पुनः उपयोग” इस विषय पर रखा गया। जिसमें श्रीमती नेहाजी सियाल ने अपनी क्रिएटिविटी दर्शाई, और पुरानी वस्तुएं जिनका हम इस्तमाल नहीं करते है, उनको नई वस्तुओं में परिवर्तित कर कैसे उपयोग में लाए इसका अलग-अलग उदाहरण देकर प्रदर्शन किया। उन्होंने कन्याओं को पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले वस्तुओं को अपने जीवन से धीरे-धीरे हटाने और ऑर्गेनिक वस्तुओं को उपयोग में लाने की प्रेरणा दी, जैसे- प्लास्टिक टूथब्रश से वुडन टूथब्रश।
कार्यशाला का तीसरा चरण जानवरों पर हो रहे हिंसा पर रखा गया- “Stop Animal Violence: Be The Voice For Voiceless”. इस सेशन में जानवरों पर हो रहे हिंसा पर विचार विमर्श किया गया। जिसमें हाल ही में केरल में हुए हथिनी की घटना पर चर्चा की गई। कन्याओं ने कला, कविता, भाषण और तथ्य के माध्यम से अपने विचार प्रस्तुत किए। कूल १६ कन्याएं और दोनों प्रभारी इस ऑनलाइन कार्यशाला में जुड़ी। कार्यशाला का संचालन संयोजिका प्रेक्षा बड़ाला ने किया।
विश्व पर्यावरण दिवस पर डोंबिवली कन्या मंडल ने किया स्पेशल कार्यशाला का आयोजन

